विश्व जैव विविधता दिवस पर नरड़ स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
कैथल, 23 मई: विश्व जैव विविधता दिवस के अवसर पर हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड की ओर से गांव नरड़ स्थित नरड़ांचल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वन विभाग के वन राजिक अधिकारी पूंडरी महावीर सिंह पठानिया उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पौधे लगाने, पर्यावरण संरक्षण तथा प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया।
जिला समन्वयक रेखा लोहान ने जैव विविधता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने पॉलीथीन के कम उपयोग, रासायनिक दवाइयों के सीमित प्रयोग तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए जैव संरक्षण अपनाने की सलाह दी।
कार्यक्रम में गांव सौंगल से पहुंचे बीएमसी अध्यक्ष संदीप कुमार ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि जल और जंगल के बिना जीवन संभव नहीं है, इसलिए इन प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। विभाग की ओर से उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए उन्हें प्रोत्साहन पत्र देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय में पेंटिंग, प्रश्नोत्तरी, रंगोली, भाषण और निबंध लेखन जैसी विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं को दो वर्गों — चौथी से सातवीं तथा आठवीं से बारहवीं कक्षा — में विभाजित किया गया। कुल 154 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
रंगोली प्रतियोगिता में दीपिका प्रथम और मनप्रीत द्वितीय स्थान पर रहे। निबंध लेखन में रूद्र और जया प्रथम जबकि कृति और शिवानी द्वितीय स्थान पर रहे। भाषण प्रतियोगिता में माफी और दिक्षा प्रथम तथा अरमान और राधिका द्वितीय स्थान पर रहे।
पोस्टर प्रतियोगिता में जसन और साक्षी प्रथम, प्राची और दक्ष द्वितीय तथा आशा और नैंसी तृतीय स्थान पर रहे। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में संजय ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि परी और आरव ने भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में वन रक्षक मनोज कुमार, विद्यालय प्रधानाचार्य सीमा, अध्यापक राहुल, सरपंच सतीश कुमार, पंच बलजीत तथा अन्य बीएमसी सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया।










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