‘मैं शिव हूं’ विषय पर कैथल में विशेष व्याख्यान, प्रो. राज नेहरू ने चेतना और शिवत्व का संबंध समझाया
कैथल, 20 मई: महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय और इन्दिरा गांधी महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “I am Shiva” विषय पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
महाविद्यालय की प्रधानाचार्या ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कैथल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महिला शिक्षा के क्षेत्र में महाविद्यालय की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और व्यक्तित्व विकास का आधार है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने शिव के आध्यात्मिक और साधनात्मक स्वरूप को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि “मैं शिव हूं” का अर्थ व्यक्ति की उस चेतना से है, जो परम चेतना से जुड़ी होती है। इस अवसर पर उन्होंने निर्वाण अष्टक का पाठ भी किया।
मुख्य वक्ता प्रो. राज नेहरू ने कश्मीर शैव दर्शन और प्रत्यभिज्ञा दर्शन की विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि “मैं शिव हूं” का भाव व्यक्ति के भीतर स्थित चेतना के अनुभव से संबंधित है। उन्होंने आधुनिक क्वांटम सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सम्पूर्ण ब्रह्मांड एक ही ऊर्जा से जुड़ा हुआ है और चेतना के स्तर पर सभी अस्तित्व एकत्व का अनुभव करते हैं।
प्रो. नेहरू ने कहा कि माया शुद्धता और अशुद्धता के बीच सेतु का कार्य करती है तथा मनुष्य के भीतर मौजूद तीन प्रकार के मल आध्यात्मिक उन्नति में बाधा बनते हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए उन्होंने विभिन्न साधनात्मक उपायों का भी वर्णन किया।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय की शोध छात्रा कु. नीलम कौशिक द्वारा लिखित पुस्तक ‘भरत के राम’ का विमोचन किया गया। अंत में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. संजय गोयल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गोविन्द वल्लभ ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अधिकारी, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, महाविद्यालय की प्रबंध समिति के पदाधिकारी और कैथल के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।










Leave a Reply