भाजपा द्वारा हरियाणा में ‘सुशासन’ और ‘विकास’ का खोखला और क्रूर चेहरा : रणदीप सुरजेवाला
कैथल, 10 मई 2026: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महासचिव एवं सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कैथल से एक प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि हरियाणा आज निराशा, अवसाद और मौतों के खौफनाक दलदल में धंसता जा रहा है। उन्होंने एनसीआरबी के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में प्रदेश में 3360 लोगों ने आत्महत्या कर ली। यानी हर दिन औसतन 9 हरियाणवी इस व्यवस्था से हारकर अपनी जान दे रहे हैं। यह महज आंकड़े नहीं हैं। ये 3360 परिवारों की दर्दनाक चीखें हैं, जो एक पूरी तरह फेल हो चुके, संवेदनहीन और नाकारा सिस्टम की गवाही दे रहे हैं।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि ‘सुशासन’, ‘विकास’ और ‘हरियाणा की उड़ान’ का ढोल पीटने वाली भाजपा सरकार ने युवाओं, छात्रों, किसानों और आम आदमी को बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक असुरक्षा और मानसिक तनाव के गहरे अंधकार में धकेल दिया है। हरियाणा में आए दिन हो रही आमहत्याएं वास्तव में ये आत्महत्याएँ नहीं, बल्कि संस्थागत हत्याएँ हैं। एक ऐसी व्यवस्था की हत्याएँ, जो लोगों को अकेला छोड़ देती है, उनकी मदद नहीं करती और उन्हें मरने के लिए मजबूर कर देती है।
रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि एनसीआरबी और जमीनी हकीकत के कुछ डरावने आंकड़े देखिए कि पूरे साल 2024 में 3360 आत्महत्याएँ — हर 24 घंटे में 9 परिवार बिखर गए। 678 लोगों ने महंगी स्वास्थ्य सेवाओं, लंबी बीमारी और सरकारी सिस्टम की बेरुखी के कारण जान दे दी। इलाज न मिलने और आर्थिक बोझ सहन न कर पाने के कारण ये मौतें हुईं। 284 छात्रों ने बेरोजगारी, परीक्षा के भारी दबाव, भविष्य की अनिश्चितता और कोचिंग-कैरियर की दौड़ में अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। NIT कुरुक्षेत्र, गुरुग्राम और कोटा जैसे स्थानों पर बार-बार हो रही छात्र आत्महत्याएँ इसकी तस्दीक करती हैं।
सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा में 1 लाख आबादी पर मात्र 0.75 मनोचिकित्सक उपलब्ध हैं, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के न्यूनतम मानकों से भी काफी कम है। सरकारी अस्पतालों में मनोचिकित्सकों और काउंसलर्स की भारी कमी है। अधिकांश जिलों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ नाममात्र की हैं।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार एक तरफ़ बड़े-बड़े विज्ञापनों, इवेंट्स, शो-ऑफ और प्रचार पर करोड़ों रुपये फूंक रही है, वहीं दूसरी तरफ युवाओं और आम नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य, रोजगार सृजन और बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान देने की बजाय आँखें मूंदे बैठी है।
रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा सरकार से सीधे और कड़े सवाल पूछते हुए कहा कि:
क्या यही है भाजपा का हरियाणा के प्रति ‘विकास’ और ‘सुशासन’?
बेतहाशा बढ़ती बेरोजगारी, आसमान छूती महंगाई, किसानों की बदहाली और युवाओं में बढ़ता आर्थिक-मानसिक तनाव — क्या रोज़ाना हो रही 9 आत्महत्याएँ इस ‘विकास मॉडल’ का असली चेहरा नहीं हैं? प्रदेश के युवा और आम आदमी अपनी उम्मीदों को कुचलता हुआ महसूस क्यों कर रहा है?
इलाज के बिना मौत के मुंह में क्यों धकेला जा रहा है?
जब हरियाणा का युवा और आम नागरिक गंभीर अवसाद, तनाव और मानसिक बीमारियों से जूझ रहा है, तो सरकारी अस्पतालों में मनोचिकित्सकों और काउंसलर्स की पर्याप्त नियुक्ति क्यों नहीं की गई? स्वास्थ्य विभाग का बजट कहाँ जा रहा है? क्या सिर्फ़ बड़े-बड़े अस्पतालों के शिलान्यास और फोटो सेशन्स ही काफी हैं?
इस बर्बादी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या सत्ता के अहंकार में अंधी यह सरकार इन 3360 परिवारों की बर्बादी, इन मासूम बच्चों की अनाथी और इन माताओं-बहनों की वेदना की नैतिक जिम्मेदारी लेगी? या फिर विज्ञापनों और प्रचार पर करोड़ों खर्च करते हुए इस मुद्दे को भी दबाने की कोशिश करेगी?
उन्होंने कहा कि हरियाणा का आमजनमानस, युवा, छात्र और किसान अब इस घुटन भरी, संवेदनहीन और नाकारा व्यवस्था से पूरी तरह थक चुका है।
हम मांग करते हैं कि भाजपा सरकार तुरंत निम्नलिखित कदम उठाए:
• हर जिले में कम से कम एक पूर्ण रूप से सुसज्जित मानसिक स्वास्थ्य केंद्र स्थापित करे और पर्याप्त मनोचिकित्सकों की भर्ती करे।
• बेरोजगारी को गंभीरता से दूर करने के लिए ठोस रोजगार नीति और युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शुरू करे।
• स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ, सस्ता और गुणवत्तापूर्ण बनाए, खासकर मानसिक स्वास्थ्य और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए।
• स्कूलों और कॉलेजों में नियमित काउंसलिंग सिस्टम लागू करे।
रणदीप सुरजेवाला ने मुख्यमंत्री नायब सैनी को चेताते हुए कहा कि हरियाणा को बचाओ, युवाओं को बचाओ, उम्मीदों को बचाओ। भाजपा के इस नाकारा सिस्टम को बदलो और संवेदनशील व जवाबदेह व्यवस्था लाओ।















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