कैथल। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय (MVSU) के टीक परिसर में विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्राध्यापक प्रतिनिधियों की उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के बीच प्रशासनिक एवं शैक्षणिक समन्वय मजबूत करने, आगामी परीक्षाओं में पारदर्शिता एवं शुचिता सुनिश्चित करने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
NEP-2020 के प्रमहर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय में संबद्ध महाविद्यालयों की उच्च-स्तरीय समन्वय बैठक, NEP-2020 और परीक्षा व्यवस्था पर हुआ मंथनभावी क्रियान्वयन पर जोर
बैठक का शुभारंभ कुलसचिव एवं महाविद्यालय अधिष्ठाता प्रो. संजय गोयल के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने बैठक के उद्देश्यों और कार्यसूची की जानकारी दी।
अध्यक्षीय संबोधन में कुलगुरु आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय का महत्वपूर्ण माध्यम है। विद्यार्थियों का समग्र विकास तभी संभव है, जब पारंपरिक शास्त्र ज्ञान को आधुनिक अनुसंधान और नवाचार से जोड़ा जाए।
उन्होंने वर्ष 2047 तक विश्वविद्यालय के विकास के लिए तीन रणनीतिक चरणों में तैयार व्यापक दृष्टिकोण भी साझा किया, जो विकसित भारत@2047 के राष्ट्रीय मिशन के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ नैतिक मूल्यों, शोध की प्रवृत्ति और रोजगारपरक कौशल का विकास भी जरूरी है।
परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समयबद्धता पर चर्चा
परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला ने आगामी परीक्षाओं के व्यवस्थित, निष्पक्ष और समयबद्ध आयोजन को लेकर विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की शुचिता, गोपनीयता, पारदर्शी मूल्यांकन तथा समय पर परीक्षा परिणाम घोषित करने के लिए अपनाए जा रहे उपायों की जानकारी दी।
कुलगुरु ने छात्र-केंद्रित विभिन्न पहलों और नई प्रणालियों के माध्यम से परीक्षा एवं परिणाम प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और सुगम बनाने पर भी जोर दिया।
क्रेडिट ट्रांसफर और कौशल विकास पाठ्यक्रमों की जानकारी
NEP समन्वयक डॉ. कृष्ण चंद्र पांडे ने नवीन पाठ्यचर्या ढांचे, क्रेडिट ट्रांसफर प्रणाली और कौशल विकास पाठ्यक्रमों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि प्राच्य एवं आधुनिक विषयों के एकीकृत अध्ययन से विद्यार्थियों के लिए रोजगार तथा उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
संवाद सत्र में संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्यों एवं प्राध्यापक प्रतिनिधियों ने अपने संस्थागत अनुभव साझा किए और विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए। श्री माता मनसा देवी संस्कृत राजकीय महाविद्यालय, पंचकुला की प्राचार्या डॉ. सीमा सिंह ने संबद्ध संस्थानों की ओर से विचार रखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिए जा रहे सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
मुंदड़ी स्थित निर्माणाधीन मुख्य परिसर का किया निरीक्षण
बैठक का संचालन महाविद्यालय उप-अधिष्ठाता डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र ने किया। समापन अवसर पर शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और कल्याण मंत्र का पाठ किया।
दोपहर के भोजन के बाद सभी प्रतिनिधियों ने मुंदड़ी, कैथल स्थित महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन मुख्य परिसर का भ्रमण किया। प्रतिनिधियों ने परिसर में चल रहे तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचागत विकास पर संतोष व्यक्त किया।
सभी सदस्यों ने विश्वविद्यालय की स्थापना एवं विकास में पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधियों ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार का हिस्सा बनना उनके लिए गौरव और सौभाग्य की बात है। उन्होंने भविष्य में भी विश्वविद्यालय के विकास कार्यों से जुड़े रहने और निर्माणाधीन परिसर का पुनः भ्रमण करने की इच्छा व्यक्त की।
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MVSU कैथल में संबद्ध महाविद्यालयों की उच्च-स्तरीय बैठक हुई। NEP-2020, परीक्षा पारदर्शिता, क्रेडिट ट्रांसफर और विश्वविद्यालय विकास पर चर्चा हुई।
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