कैथल, 25 सितंबर। धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाओं को रोकने और फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए कैथल जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। एडीसी डा. सुशील कुमार ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करें, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ाई जा सके।
लघु सचिवालय स्थित कॉन्फ्रेंस रूम में फसल अवशेष प्रबंधन और पराली प्रबंधन को लेकर आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए एडीसी डा. सुशील कुमार ने अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से किसानों को पराली प्रबंधन के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके अलावा इन-सीटू और एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को मशीनें भी उपलब्ध करवाई जा रही हैं।
पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान
एडीसी ने कहा कि पराली जलाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। इसलिए किसानों को फसल अवशेषों को खेत में मिलाने या अन्य उचित माध्यमों से प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के साथ लगातार संवाद स्थापित कर उन्हें पराली न जलाने और उपलब्ध मशीनरी का उपयोग करने के लिए जागरूक किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सरकार द्वारा दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए गए हैं। किसान यदि पराली जलाते हुए पाए जाते हैं तो जुर्माना, राजस्व रिकॉर्ड में रेड एंट्री सहित नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
629 नोडल अधिकारी करेंगे पराली प्रबंधन की निगरानी
एडीसी ने बताया कि कैथल जिले में फसल अवशेष प्रबंधन की निगरानी के लिए 629 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। ये अधिकारी संबंधित अधिकारियों के निर्देशन में फील्ड में निगरानी कर रहे हैं।
उन्होंने निर्देश दिए कि पिछले वर्ष जिन गांवों में पराली जलाने की घटनाएं अधिक रही थीं और जो रेड या येलो जोन में रहे हैं, वहां विशेष निगरानी की जाए। साथ ही धरातल स्तर पर प्रभावी मॉनिटरिंग व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
किसानों तक समय पर पहुंचें पराली प्रबंधन की मशीनें
एडीसी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों के लिए उपलब्ध करवाई जा रही पराली प्रबंधन मशीनों की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सीजन के दौरान मशीनें किसानों तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि फसल अवशेषों का प्रबंधन प्रभावी तरीके से किया जा सके।
बैठक में एसडीएम संजय कुमार, डीडीए डा. रविंद्र जाखड़ और डीएसपी सुशील प्रकाश सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। इससे पहले राज्य स्तर पर भी पराली प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की गई।
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कैथल में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक के लिए 629 नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं। एडीसी डा. सुशील कुमार ने किसानों से पराली प्रबंधन कर भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ाने की अपील की।
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