पीएम विश्वकर्मा योजना से कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को मिल रही नई पहचान : डीसी अपराजिता
कैथल, 09 मई 2026: डीसी अपराजिता ने कहा कि शिल्पकार और कारीगर समाज के नवनिर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनके हुनर को सम्मान और पहचान देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा पीएम विश्वकर्मा योजना चलाई जा रही है, जिससे पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को नई पहचान मिल रही है।
उन्होंने बताया कि पीएम विश्वकर्मा योजना भारत की पारंपरिक कला और शिल्पकला को संरक्षित रखने तथा कारीगरों और शिल्पकारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक है। योजना का मुख्य उद्देश्य उनके उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करना तथा उनकी पहुंच घरेलू और वैश्विक बाजारों तक बढ़ाना है।
डीसी ने बताया कि यह योजना ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को समान रूप से सहायता प्रदान करती है। योजना के अंतर्गत 18 प्रकार के पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया गया है। इनमें नाव बनाना, लुहार कार्य, हथौड़ा और लोहे के औजार बनाना, ताला बनाना, सुनार, कुंभकार, मूर्तिकार, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी और चटाई बनाना, बढ़ई कार्य, गुड़िया एवं खिलौने बनाना, नाई, धोबी, दर्जी तथा मछली पकड़ने के जाल बनाने का कार्य शामिल है।
उन्होंने पात्र कारीगरों और शिल्पकारों से अपील की कि वे जल्द से जल्द योजना के तहत अपना पंजीकरण करवाकर इसका लाभ उठाएं। आवेदन पत्र को संबंधित गांव के सरपंच या शहरी क्षेत्र में स्थानीय निकाय के पार्षद द्वारा सत्यापित किया जाएगा कि आवेदक वास्तव में संबंधित कारीगरी का कार्य करता है।
डीसी अपराजिता ने कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कौशल को बढ़ावा देने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूत कर रही है। यह योजना कारीगरों और शिल्पकारों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर उपलब्ध करा रही है।









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