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विश्व स्तनपान सप्ताह: मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण आहार, पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना जरूरी : सिविल सर्जन

कैथल, 3 अगस्त। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशानुसार जिले में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इस वर्ष अभियान की थीम “जीवन की सतत एवं स्वास्थ्य शुरुआत के लिए स्तनपान, जो प्रभावी है, इसे और सशक्त बनाएं” रखी गई है। अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों पर गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को स्तनपान के महत्व और उसके लाभों के बारे में जागरूक कर रहा है।

सिविल सर्जन डॉ. रेणु चावला ने बताया कि अभियान का उद्देश्य प्रत्येक मां को स्तनपान के लिए सही जानकारी, आवश्यक सहयोग और प्रोत्साहन उपलब्ध कराना है। इसी लक्ष्य के तहत स्वास्थ्य विभाग मां (Mother Absolute Affection – MAA) कार्यक्रम के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चला रहा है, ताकि प्रत्येक नवजात शिशु को जीवन के शुरुआती दिनों में मां के दूध का पूरा लाभ मिल सके।

उन्होंने बताया कि मां का दूध शिशु के लिए संपूर्ण और सर्वोत्तम आहार है। इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में मौजूद होते हैं, जो बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना बेहद जरूरी है, क्योंकि मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) नवजात के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है।

डॉ. रेणु चावला ने कहा कि जन्म से छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध ही देना चाहिए। इस दौरान बच्चे को पानी या किसी अन्य तरल पदार्थ की आवश्यकता नहीं होती। छह माह पूरे होने के बाद पौष्टिक पूरक आहार शुरू करते हुए कम से कम दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।

उन्होंने बताया कि मां के दूध में मौजूद एंटीबॉडी शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती हैं और उसे संक्रमणों से बचाती हैं। यह आसानी से पच जाता है, जिससे पेट संबंधी समस्याओं का खतरा कम रहता है। साथ ही लंबे समय में मोटापा, मधुमेह, अस्थमा और अन्य गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में भी मदद मिलती है। स्तनपान मां और शिशु के बीच भावनात्मक संबंध को भी मजबूत बनाता है।

सिविल सर्जन ने कहा कि स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं, बल्कि मां के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद वजन नियंत्रित करने, गर्भाशय को सामान्य स्थिति में लाने और प्रसवोत्तर रक्तस्राव कम करने में मदद मिलती है। नियमित स्तनपान कराने से स्तन कैंसर, डिम्बग्रंथि (ओवेरियन) कैंसर और टाइप-2 मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा भी कम हो जाता है।

उन्होंने जिलेवासियों, परिवार के सदस्यों और स्वास्थ्य कर्मियों से अपील की कि वे स्तनपान कराने वाली माताओं का पूरा सहयोग करें, स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें और प्रत्येक नवजात शिशु को स्वस्थ एवं सुरक्षित जीवन की शुरुआत दिलाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।

प्रमुख बातें

  • 1 से 7 अगस्त तक मनाया जा रहा है विश्व स्तनपान सप्ताह।
  • जन्म के पहले एक घंटे में स्तनपान शुरू करने की सलाह।
  • पहले छह माह तक केवल मां का दूध ही पर्याप्त।
  • छह माह बाद पूरक आहार के साथ दो वर्ष तक स्तनपान जारी रखने की सलाह।
  • स्तनपान से शिशु और मां दोनों के स्वास्थ्य को मिलते हैं अनेक लाभ।
  • स्वास्थ्य विभाग जिलेभर में चला रहा है जागरूकता अभियान।

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