गतिविधियों के जरिए बच्चों की झिझक दूर करने और प्रतिभा निखारने पर फोकस, मिड डे मिल की गुणवत्ता जांचने के भी निर्देश
कैथल, 18 अगस्त। एडीसी डॉ. सुशील कुमार ने कहा कि स्टंबल लैब का मुख्य उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाना है, ताकि विद्यार्थी बिना झिझक और पूरे उत्साह के साथ अपनी बात रख सकें। उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों को निर्देश दिए कि राजकीय स्कूलों में स्टंबल लैब के तहत गुणवत्तापरक गतिविधियां नियमित रूप से आयोजित की जाएं और बच्चों की प्रगति का लगातार आकलन किया जाए।
एडीसी डॉ. सुशील कुमार मंगलवार को लघु सचिवालय के सभागार में स्टंबल लैब को लेकर आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बच्चों में पढ़ाई के प्रति जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ उनकी प्रतिभा और व्यक्तित्व विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। गतिविधियों के माध्यम से बच्चों की घबराहट और झिझक दूर करने के प्रयास किए जाएं।
उन्होंने कहा कि किसी गतिविधि में असफल होने पर बच्चों को निराश होने के बजाय अगली गतिविधि में और अधिक उत्साह के साथ भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाए। स्टंबल लैब के माध्यम से विद्यार्थियों को स्पष्ट रूप से बोलने, आत्मविश्वास बढ़ाने और अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है। उन्होंने शिक्षकों को बच्चों की प्रगति की नियमित आकलन रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में राजकीय स्कूल शेरगढ़, पूंडरी, करोड़ा, बलवंती, गुहला, कलायत और सीवन में स्टंबल लैब के तहत किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों से जानकारी ली गई कि इन स्कूलों में स्टंबल लैब की गतिविधियां किस स्तर पर संचालित की जा रही हैं और विद्यार्थियों को इनका कितना लाभ मिल रहा है।
एडीसी ने कहा कि बच्चों को लगातार मोटिवेट किया जाना जरूरी है, ताकि वे शिक्षा के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी रुचि लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने बीईओ के साथ-साथ स्पेशल शिक्षकों को भी नियमित रूप से कक्षाएं लगाने और बच्चों की जरूरत के अनुसार मार्गदर्शन देने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जिन राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां आसपास के स्कूलों में उपलब्ध सरप्लस शिक्षकों को आवश्यकता के अनुसार समायोजित किया जाए। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी को समुचित प्लान तैयार करने के निर्देश दिए गए, ताकि किसी भी स्कूल की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो।
मिड डे मिल की गुणवत्ता की नियमित जांच के निर्देश
एडीसी डॉ. सुशील कुमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजकीय स्कूलों में मिड डे मिल के तहत विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने नियमित जांच के लिए खंडवार ड्यूटी रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अधिकारी जब भी स्कूलों का निरीक्षण करें तो मिड डे मिल की गुणवत्ता, व्यवस्था और अन्य संबंधित पहलुओं की भी अनिवार्य रूप से जांच करें। किसी प्रकार की समस्या सामने आने पर तत्काल उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाए।
एडीसी ने अधिकारियों से मिड डे मिल व्यवस्था को लेकर फीडबैक भी लिया और निर्देश दिए कि सामने आ रही समस्याओं को लिखित रूप में उपलब्ध करवाया जाए, ताकि उन्हें मुख्यालय स्तर पर भेजकर समाधान करवाया जा सके। बैठक में शिक्षा विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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