प्रो-एक्टिव नीति से 41 हजार से अधिक लोगों की घर बैठे बनी पेंशन, 2.47 लाख लाभार्थियों को मिल रहा योजनाओं का लाभ : डीसी अपराजिता
कैथल। डीसी अपराजिता ने कहा कि केंद्र सरकार के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल के दौरान आमजन के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ पात्र लोगों तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंच रहा है। वहीं हरियाणा सरकार द्वारा लागू की गई प्रो-एक्टिव नीति ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लोगों तक घर बैठे पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
डीसी ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक जिले में 41 हजार 853 लोगों की सामाजिक सुरक्षा पेंशन स्वतः बनाई गई है। लाभार्थियों को न तो आवेदन करना पड़ा और न ही सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़े। उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले 12 वर्षों में कई बार पेंशन राशि में भी बढ़ोतरी की है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। इसी दिशा में परिवार पहचान पत्र (पीपीपी) के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को प्रो-एक्टिव मोड में लागू किया गया है। पीपीपी में दर्ज आंकड़ों के आधार पर पात्रता पूरी होने पर विभाग स्वयं कार्रवाई कर लाभार्थियों को योजनाओं से जोड़ता है।
डीसी अपराजिता ने बताया कि सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिव्यांग पेंशन के लिए दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा को 70 प्रतिशत से घटाकर 60 प्रतिशत किया गया है। साथ ही दिव्यांगता की श्रेणियों की संख्या 7 से बढ़ाकर 21 कर दी गई है, जिससे अधिक दिव्यांगजन योजनाओं का लाभ प्राप्त कर सकें।
जिला समाज कल्याण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में जिले में 2 लाख 47 हजार 941 लाभार्थी विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन एवं वित्तीय सहायता योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इनमें 1 लाख 22 हजार 260 वृद्धजन वृद्धावस्था सम्मान भत्ता योजना के तहत प्रतिमाह 3,200 रुपये प्राप्त कर रहे हैं।
इसके अलावा 48 हजार 745 विधवा एवं निराश्रित महिलाओं को प्रतिमाह 3,200 रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है। वहीं 43 हजार 316 महिलाओं को दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत हर माह 2,100 रुपये का लाभ मिल रहा है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी अमितेंद्र श्योकंद ने बताया कि 15 हजार 189 निराश्रित बच्चों को वित्तीय सहायता, 9 हजार 930 दिव्यांगजनों को दिव्यांग पेंशन, 5 हजार 307 विधुर एवं अविवाहित व्यक्तियों को वित्तीय सहायता तथा 2 हजार 51 महिलाओं को लाडली सामाजिक सुरक्षा भत्ता प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि 673 मंदबुद्धि बच्चों, 461 कैंसर रोगियों तथा 8 बौना एवं 1 किन्नर लाभार्थी को भी नियमित आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके अलावा एसिड अटैक पीड़ितों को उनकी दिव्यांगता के प्रतिशत के अनुसार 8 हजार रुपये से 14 हजार 400 रुपये तक मासिक सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।
उन्होंने कहा कि दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना का दायरा भी बढ़ाया गया है। अब 1.80 लाख रुपये तक की वार्षिक आय वाले उन परिवारों की महिलाओं को भी योजना में शामिल किया गया है, जिनके बच्चे कुपोषण से बाहर आए हैं, जिन्होंने सरकारी विद्यालयों में अध्ययन करते हुए 10वीं अथवा 12वीं कक्षा में 80 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त किए हैं या निपुण भारत मिशन के अंतर्गत निर्धारित ग्रेड हासिल किए हैं।

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