खेत बचाओ अभियान के अंतर्गत हरियाणा भर में आयोजित होंगे विशेष जागरूकता कार्यक्रम
कैथल। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक एवं असंतुलित उपयोग से मृदा क्षरण, मृदा कार्बन में कमी, पोषक तत्वों के असंतुलन तथा जल प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा शुरू किए गए “खेत बचाओ अभियान” के तहत हरियाणा के सभी कृषि विज्ञान केंद्र 1 जून से 30 जून 2026 तक किसानों के लिए व्यापक जन-जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेंगे।
अभियान का उद्देश्य कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखना, उत्पादन लागत को कम करना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करना तथा किसानों को टिकाऊ और लाभकारी कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रेरित करना है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रोफेसर बलदेव राज कांबोज ने बताया कि अभियान के दौरान गांव स्तरीय बैठकें, किसान गोष्ठियां, प्रशिक्षण कार्यक्रम, खेत दिवस, प्रदर्शनियां, रैलियां, जागरूकता शिविर और प्रक्षेत्र प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड आधारित उर्वरक प्रबंधन, हरी खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट तथा जैव उर्वरकों के उपयोग के बारे में जागरूक किया जाएगा। साथ ही असली और नकली कीटनाशकों की पहचान तथा खाद्य तेल की खपत में कमी लाने के लिए स्वस्थ जीवनशैली और खान-पान संबंधी व्यवहार अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा।
प्रोफेसर कांबोज ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान बाहरी आदानों पर निर्भरता कम कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती मृदा स्वास्थ्य सुधारने, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति लचीलापन बढ़ाने तथा उत्पादन लागत घटाने का एक टिकाऊ और आर्थिक रूप से व्यवहार्य विकल्प है। खरीफ फसलों में संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए किसानों को हरी खाद और जैविक खादों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि इस अभियान का पहला चरण अप्रैल माह में शुरू हुआ था और 31 मई को संपन्न हुआ। इसके अंतर्गत हरियाणा के विभिन्न जिलों में कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा जागरूकता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, खेत प्रदर्शन और संगोष्ठियां आयोजित की जा चुकी हैं।
विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. नरेश कौशिक ने बताया कि किसानों को जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, मृदा संरक्षण और फसल विविधीकरण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा। खेत बचाओ अभियान के तहत अब तक प्यौदा, राजौंद, संगरौली और रावणहेड़ा गांव में कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। आगामी दिनों में किच्छाना, कठवाड़, लैंडरपीरजादा, रसीना, गोहरां, सांच, वजीरनगर, पबनावा, कैलरम, दुब्बल, सिसला, जसवंती, नौंच, सजूमा, चक्कू लदाना, गुहणा और देवबन गांवों में भी विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।



Leave a Reply