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डीसी अपराजिता ने फरल गांव में कुषाण एवं मध्यकालीन पुरास्थलों का किया निरीक्षण

डीसी अपराजिता ने फरल गांव में कुषाण एवं मध्यकालीन पुरास्थलों का किया निरीक्षण

📍 कैथल | 🗓️ 27 मई 2026

कैथल, 27 मई: डीसी अपराजिता ने मंगलवार को फरल गांव का दौरा कर ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक महत्व से जुड़े स्थलों का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरेंद्र परमार तथा अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

दौरे के दौरान कुषाण काल से जुड़े पुरास्थलों और अवशेषों का अवलोकन किया गया तथा क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

डीसी अपराजिता ने कहा कि फरल गांव एक प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व का स्थान है, जिसकी बहुत पुरानी मान्यता रही है। यहां कुषाण काल से संबंधित एक महत्वपूर्ण स्तूप मौजूद है, जिसका निरीक्षण किया गया। उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के दौरान स्थल से पेंटेड रेड वेयर (चित्रित लाल मिट्टी के बर्तन), कलाकृतियां तथा अन्य पुरातात्विक अवशेष भी मिले हैं, जो क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुरातत्व विभाग द्वारा कुषाण काल से जुड़े अन्य साक्ष्य जुटाने के प्रयास किए जाएंगे तथा भारतीय पुरातत्व और संरक्षण मानकों के अनुरूप आगे की कार्रवाई कर ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने फल्गु तीर्थ स्थित पुराने एवं नए मंदिरों में माथा भी टेका।

हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. नरेंद्र परमार ने कहा कि कैथल जिले के पुरातात्विक महत्व को राज्य और विश्व स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि फरल क्षेत्र एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है, जहां कुषाण काल से लेकर मध्यकाल तक की सांस्कृतिक निरंतरता के प्रमाण मिले हैं।

उन्होंने कहा कि प्रारंभिक अध्ययन के अनुसार इस क्षेत्र में दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के आसपास मानव बसावट की शुरुआत हुई थी। यहां मौजूद प्राचीन टीला और धार्मिक स्थल आज भी स्थानीय लोगों की आस्था और इतिहास से जुड़े हुए हैं। दौरे के दौरान फल्क ऋषि आश्रम स्थल का भी निरीक्षण किया गया।

डॉ. परमार ने बताया कि कैथल क्षेत्र का इतिहास सिंधु-सरस्वती सभ्यता से जुड़ा हुआ है और बालू गांव भी इस भूभाग का एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक केंद्र रहा है। करीब पांच हजार वर्ष पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक विकास की निरंतरता इस क्षेत्र की विशेष पहचान है।

उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा, प्राचीन लेखन प्रणाली, वास्तुकला, सील और सांस्कृतिक विकास जैसे विषयों पर भी भविष्य में कार्य किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जिला प्रशासन और डीसी अपराजिता के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि कैथल के गौरवशाली इतिहास को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में लगातार कार्य किया जाएगा।

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