Meta Title: बिजली वितरण निजीकरण पर माकपा का विरोध | हरियाणा समाचार
Meta Description: गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को 25 साल का बिजली वितरण लाइसेंस देने पर माकपा ने विरोध जताया। प्रेमचंद ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन कर जनता से एकजुट होने की अपील की।
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गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को 25 साल का लाइसेंस देने के फैसले का विरोध, बिजली कर्मचारियों की हड़ताल के समर्थन में उतरी पार्टी
कैथल, 21 अक्टूबर 2026। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा के हरियाणा राज्य सचिवमंडल ने गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी ‘इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड’ को 25 वर्षों के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस देने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। पार्टी ने हरियाणा बिजली नियामक आयोग के इस फैसले को जनता के हितों के खिलाफ बताते हुए बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण पर चिंता जताई है।
पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में हरियाणा राज्य सचिव प्रेमचंद ने कहा कि निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देना सार्वजनिक संसाधनों और सरकारी बिजली कंपनियों के हितों को प्रभावित करने वाला कदम है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और हरियाणा की भाजपा सरकारें सार्वजनिक एवं प्राकृतिक संसाधनों को निजी पूंजीपतियों के हवाले कर रही हैं।
सरकारी बिजली निगम के राजस्व पर पड़ेगा असर: माकपा
प्रेमचंद के अनुसार, गुरुग्राम और नूंह औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। इन क्षेत्रों से सरकारी बिजली कंपनी को अच्छा राजस्व प्राप्त होता है। ऐसे में इन जिलों में निजी कंपनी को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने आशंका जताई कि इससे आम उपभोक्ताओं और कृषि क्षेत्र को सस्ती तथा सब्सिडी वाली बिजली उपलब्ध कराने की सरकारी निगम की क्षमता कमजोर हो सकती है।
बिजली दरें बढ़ने और सब्सिडी खत्म होने की जताई आशंका
माकपा नेता ने कहा कि निजी कंपनियों का प्राथमिक उद्देश्य मुनाफा कमाना होता है, जबकि सार्वजनिक बिजली निगमों की जिम्मेदारी आम जनता को बिजली उपलब्ध कराना भी है। उनके अनुसार, निजी कंपनियां लाभ वाले औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दे सकती हैं, जबकि गरीब बस्तियों, गांवों और कृषि क्षेत्र की बिजली आपूर्ति का आर्थिक बोझ सरकारी निगमों पर रह सकता है।
उन्होंने स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। प्रेमचंद ने आशंका जताई कि प्रीपेड मीटर व्यवस्था के माध्यम से उपभोक्ताओं को पहले भुगतान करके बिजली इस्तेमाल करनी पड़ेगी और भविष्य में क्रॉस सब्सिडी तथा कृषि सब्सिडी को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। माकपा का कहना है कि ऐसी नीतियों से आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ बढ़ने और बिजली महंगी होने का खतरा है।
निजीकरण से रोजगार पर असर पड़ने की आशंका
प्रेमचंद ने टेलीफोन क्षेत्र में निजी कंपनियों को बढ़ावा दिए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि बिजली क्षेत्र में भी समानांतर वितरण लाइसेंस की व्यवस्था लागू करना सार्वजनिक बिजली कंपनियों के लिए चुनौती बन सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजीकरण से युवाओं के लिए बेहतर रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे और कर्मचारियों को प्रतिकूल सेवा शर्तों पर काम करना पड़ सकता है।
अन्य शहरों में भी निजी कंपनियों को लाइसेंस देने की आशंका
माकपा ने आशंका जताई कि गुरुग्राम और नूंह से शुरू हुई यह प्रक्रिया भविष्य में फरीदाबाद, बहादुरगढ़, सोनीपत, करनाल, अंबाला और पंचकूला जैसे शहरों तक पहुंच सकती है। पार्टी ने बिजली वितरण के निजीकरण के खिलाफ बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के संयुक्त मोर्चे की ओर से आंदोलन के आह्वान का स्वागत किया है।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करेगी माकपा
माकपा ने स्पष्ट किया कि पार्टी बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेगी। पार्टी ने विपक्षी राजनीतिक दलों, कर्मचारी संगठनों, किसान संगठनों, ट्रेड यूनियनों और आम नागरिकों से बिजली वितरण के निजीकरण के फैसले के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष करने की अपील की है।
पार्टी ने लोगों से बिजली कर्मचारियों की प्रस्तावित हड़ताल का पुरजोर समर्थन करने का आह्वान भी किया। माकपा के अनुसार, बिजली वितरण व्यवस्था से जुड़े फैसलों में आम उपभोक्ताओं, किसानों और कर्मचारियों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
डिस्क्लेमर: समाचार में निजीकरण, बिजली दरों, सब्सिडी और रोजगार पर व्यक्त आशंकाएं माकपा के राज्य सचिव प्रेमचंद तथा पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित हैं।
