बेटियों की सुरक्षा और सम्मान हम सबकी जिम्मेदारी: सिविल सर्जन डॉ. रेनु चावला
कैथल, 20 मई: बेटियों के सुनहरे भविष्य और समाज में लिंगानुपात को संतुलित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग कैथल द्वारा विभिन्न धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों (पंडित, मौलवी और ग्रंथी) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कन्या भ्रूण हत्या रोकने और पीसी-पीएनडीटी एक्ट के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
बैठक की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. रेनु चावला ने की। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा और सम्मान केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाजसेवियों, धार्मिक संगठनों और जागरूक नागरिकों की भागीदारी भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अपील की कि हर धार्मिक और सामाजिक मंच से बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया जाए।
बैठक में उप सिविल सर्जन डॉ. बलविंद्र गर्ग, जिला नोडल अधिकारी (पीसी-पीएनडीटी) डॉ. सचिन मांडले, उप सिविल सर्जन डॉ. विकास धवन तथा चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
डॉ. सचिन मांडले ने बताया कि गर्भ में पल रहे शिशु का लिंग बताना, पूछना या उसकी जांच करवाना पूरी तरह गैरकानूनी है। पहली बार अपराध साबित होने पर तीन वर्ष तक की सजा और 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकता है। दोबारा अपराध करने पर पांच वर्ष तक की सजा, 50 हजार रुपये या उससे अधिक जुर्माना तथा चिकित्सक का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।
उप सिविल सर्जन डॉ. बलविंद्र गर्ग ने बताया कि अवैध लिंग जांच या कन्या भ्रूण हत्या की पुख्ता जानकारी देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। साथ ही विभाग की ओर से ऐसे जागरूक नागरिक को एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अवैध लिंग जांच की सूचना सिविल सर्जन कार्यालय या जिला नोडल अधिकारी को दें, ताकि एक स्वस्थ और संतुलित समाज के निर्माण में सभी की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
बैठक में उपस्थित धर्म गुरुओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि बेटियों को बचाना और उन्हें आगे बढ़ाना ईश्वर की सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने समाज के सामूहिक प्रयासों से इस अभियान को सफल बनाने का विश्वास जताया।


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