कैथल, 21 अगस्त। क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का झांसा देकर साइबर ठगी करने वाले अपराधियों से आमजन को सावधान रहने की जरूरत है। कैथल पुलिस द्वारा साइबर अपराधों से बचाव के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। एसपी मनप्रीत सिंह सूदन ने जिलावासियों को आगाह करते हुए कहा कि साइबर ठग बैंक अधिकारी या कस्टमर केयर प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन, एसएमएस और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए अपना शिकार बना रहे हैं।
एसपी ने बताया कि साइबर अपराधी क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने का लालच देकर पहले लोगों का विश्वास जीतते हैं। इसके बाद वे कार्ड नंबर, ओटीपी, सीवीवी, जन्मतिथि और अन्य गोपनीय बैंकिंग जानकारी मांगते हैं। कई मामलों में ठग लिंक भेजकर या फर्जी मोबाइल एप डाउनलोड करवाकर मोबाइल का रिमोट एक्सेस हासिल करने की कोशिश करते हैं। संवेदनशील जानकारी मिलते ही साइबर अपराधी ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर आर्थिक नुकसान पहुंचा सकते हैं।
बैंक कभी फोन पर नहीं मांगता ओटीपी और सीवीवी
एसपी मनप्रीत सिंह सूदन ने स्पष्ट किया कि कोई भी बैंक या अधिकृत संस्था फोन पर ग्राहक से ओटीपी, कार्ड नंबर, सीवीवी या अन्य गोपनीय जानकारी नहीं मांगती। इसलिए नागरिकों को किसी अनजान व्यक्ति के साथ ऐसी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने लोगों से अपील की कि क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने या बैंकिंग सुविधा से संबंधित किसी भी अनजान कॉल और मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने तथा किसी के कहने पर मोबाइल में ऐप डाउनलोड करने से भी बचें। बैंक से संबंधित जानकारी की पुष्टि के लिए संबंधित बैंक के आधिकारिक ग्राहक सेवा नंबर पर ही संपर्क करें।
साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें कॉल
एसपी ने कहा कि साइबर ठगी का शिकार होने की स्थिति में समय बर्बाद न करें और तुरंत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करें। इसके साथ ही राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय पर शिकायत मिलने से कई मामलों में संदिग्ध लेनदेन को रोकने और ठगी की रकम वापस करवाने की संभावना बढ़ जाती है।
कैथल पुलिस की अपील: साइबर ठगी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका सतर्कता है। ओटीपी, सीवीवी, कार्ड नंबर और बैंकिंग पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें।


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