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कॉलेज कैडर भर्ती रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले का माकपा ने किया स्वागत

कॉलेज कैडर भर्ती रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले का माकपा ने किया स्वागत

📍 कैथल | 🗓️ 13 मई 2026

कैथल, 13 मई 2026: भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) हरियाणा राज्य कमेटी ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा एचपीएससी की कॉलेज कैडर भर्ती प्रक्रिया को अवैध करार देते हुए रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत किया है। पार्टी ने कहा कि इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि अभ्यर्थियों का आंदोलन पूरी तरह जायज था।

माकपा के राज्य सचिव प्रेम चंद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए बताया कि हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2024 में कॉलेज कैडर असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के तहत अंग्रेजी विषय के 613 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें 2143 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। योग्यता के लिए 35 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य किया गया था, लेकिन केवल 151 अभ्यर्थियों को ही योग्य घोषित किया गया। अन्य विषयों में भी इसी प्रकार की स्थिति रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया में अकादमिक रिकॉर्ड को दरकिनार किया गया और पिछड़ा वर्ग एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों से आय प्रमाण पत्र मांगा गया। पोर्टल बंद होने के कारण निर्धारित समय में प्रमाण पत्र बनवाना संभव नहीं था, जिसके चलते कई अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सका।

प्रेम चंद ने कहा कि विषय ज्ञान की परीक्षा तथा उसमें न्यूनतम 35 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता यूजीसी के नियमों का उल्लंघन थी। इस प्रक्रिया के माध्यम से हरियाणा के अभ्यर्थियों की उपेक्षा कर अन्य राज्यों के उम्मीदवारों का बड़ी संख्या में चयन किया गया, जिससे प्रदेश के युवाओं में भारी असंतोष उत्पन्न हुआ।

उन्होंने बताया कि भर्ती प्रक्रिया के विरोध में प्रभावित अभ्यर्थी एचपीएससी कार्यालय पंचकूला के बाहर लंबे समय से धरने पर बैठे हैं। ओबीसी समुदाय द्वारा भी अभ्यर्थियों की मांगों के समर्थन में राज्यभर में अभियान चलाया जा रहा है।

माकपा ने मांग की कि राज्य से बाहर के उम्मीदवारों की भर्ती के पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। पार्टी ने कहा कि एचपीएससी चेयरमैन आलोक वर्मा ने संवैधानिक संस्था की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए या राज्यपाल को उन्हें पद से हटाने की सिफारिश करनी चाहिए।

प्रेम चंद ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर अन्य विषयों में अपनाई गई इसी प्रकार की प्रक्रियाओं को भी तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और कॉलेज कैडर असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार मौजूदा अभ्यर्थियों में से मेरिट के आधार पर शीघ्र पूरी की जाए।

उन्होंने कहा कि प्रदेश के कॉलेजों में लंबे समय से प्राध्यापकों के हजारों पद रिक्त पड़े हैं, जिन्हें भरने में भाजपा सरकार विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि “बिना पर्ची-बिना खर्ची” का दावा अब केवल एक जुमला बनकर रह गया है। बार-बार पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं भ्रष्टाचार को उजागर करती हैं।

प्रेम चंद ने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है और शिक्षित युवाओं को स्थायी सरकारी नौकरियों से वंचित किया जा रहा है। इससे छात्र और युवा मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं तथा आत्महत्याओं की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। इसके लिए सरकार की नीतियां जिम्मेदार हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अभ्यर्थियों की मांगों को शीघ्र स्वीकार नहीं किया गया तो माकपा इस आंदोलन को और तेज करेगी।

— प्रेम चंद, राज्य सचिव, सीपीआई(एम) हरियाणा

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