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पलवल पत्रकार प्रकरण: एमडब्ल्यूबी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव और एडीजीपी से की मुलाकात, निष्पक्ष जांच की मांग

चंडीगढ़। पलवल में पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मीडिया वेल बीइंग एसोसिएशन (एमडब्ल्यूबी) के उत्तर भारत अध्यक्ष चंद्र शेखर धरणी के नेतृत्व में संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रेय और हरियाणा के एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) संजय कुमार से मुलाकात कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि पलवल के जिला लोक संपर्क अधिकारी (डीआईपीआरओ) ने संगठन के पलवल जिलाध्यक्ष गुरुदत्त गर्ग तथा अन्य पत्रकारों के साथ कथित अभद्र व्यवहार किया और पत्रकारिता कार्य में बाधा पहुंचाई। संगठन ने इसे प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और सेवा से बर्खास्त करने की मांग उठाई।

मुख्यमंत्री मीडिया सचिव प्रवीण अत्रेय ने दिया भरोसा

मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव प्रवीण अत्रेय ने प्रतिनिधिमंडल की बात गंभीरता से सुनते हुए डीजीआईपीआर हरियाणा से तत्काल चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार पत्रकारों के सम्मान और मीडिया की स्वतंत्रता के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

एडीजीपी संजय कुमार बोले- निष्पक्ष जांच होगी

हरियाणा के एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) संजय कुमार ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि पुलिस पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करेगी। उन्होंने कहा कि शिकायत के प्रत्येक पहलू की जांच कर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

एसपी पलवल को पहले ही दी जा चुकी है शिकायत

प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों को बताया कि संगठन के पलवल जिलाध्यक्ष गुरुदत्त गर्ग की ओर से इस मामले में एसपी पलवल कार्यालय में लिखित शिकायत पहले ही दी जा चुकी है। शिकायत पुलिस बुक संख्या 419 में प्राप्ति रसीद संख्या 75, दिनांक 2 जुलाई 2026 के तहत दर्ज की गई है।

पत्रकारों के सम्मान से समझौता नहीं: तरुण कपूर

एमडब्ल्यूबी के कोषाध्यक्ष तरुण कपूर ने कहा कि यदि किसी पत्रकार को वीडियो रिकॉर्डिंग से रोका जाता है, कैमरे पर हाथ मारा जाता है या अभद्र व्यवहार किया जाता है, तो यह केवल एक पत्रकार के अधिकारों का उल्लंघन नहीं बल्कि लोकतंत्र और प्रेस की स्वतंत्रता पर भी सीधा आघात है।

उन्होंने कहा कि जिला लोक संपर्क अधिकारी का दायित्व सरकार और मीडिया के बीच समन्वय स्थापित करना है। यदि इसी पद पर बैठा अधिकारी पत्रकारों के साथ अमर्यादित व्यवहार करता है तो इससे सरकार की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग

संगठन ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में पत्रकारों के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

एमडब्ल्यूबी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो संगठन का प्रतिनिधिमंडल पलवल का दौरा करेगा और जिला इकाई द्वारा लिए जाने वाले लोकतांत्रिक एवं वैधानिक निर्णयों का पूरा समर्थन करेगा।

संगठन ने विश्वास जताया कि मुख्यमंत्री, डीजीआईपीआर और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद पत्रकारों की शिकायतों पर न्यायोचित कार्रवाई होगी। साथ ही पत्रकारों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन अपना संघर्ष निरंतर जारी रखेगा।

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