कैथल, 6 सितंबर 2026। हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्ज एंड डिलर्ज एसोसिएशन की ओर से रविवार को कैथल में प्रदेश स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में प्रदेशभर से राइस मिलर्स और डीलर्स के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक की अध्यक्षता एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने की। आगामी धान सीजन को लेकर आयोजित बैठक में सीएमआर एक्सटेंशन, लंबित भुगतान, एफसीआई में स्पेस की समस्या, धान की ट्रांसपोर्टेशन, बोनस और विभागीय समस्याओं समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मंथन किया गया।
मांगें पूरी नहीं हुईं तो सीएमआर रजिस्ट्रेशन और धान खरीद से दूरी
बैठक में राइस मिलर्स ने स्पष्ट किया कि पिछले धान सीजन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों का अभी तक समाधान नहीं हुआ है। मिलर्स के अनुसार करीब 6 लाख मीट्रिक टन चावल अभी भी मिलों में पड़ा हुआ है, जिसके कारण मिलर्स के सामने नए धान सीजन को लेकर गंभीर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि जब तक सरकार अतिरिक्त सीएमआर की खरीद और राइस मिलर्स की अन्य मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक मिलर्स सीएमआर का रजिस्ट्रेशन नहीं करवाएंगे और धान खरीद में भाग नहीं लेंगे।
उन्होंने कहा कि धान का सीजन सिर पर है और किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए मिलर्स खरीद एजेंसियों को अपने मिलों के फड़ उपलब्ध करवाकर किसानों की धान लगवाने में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, धान खरीद एजेंसियों की होगी और उसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसियों की होगी। मांगों का समाधान होने तक मिलर्स स्वयं धान खरीद में भाग नहीं लेंगे।
‘एक आवाज, एक संगठन, एक संघर्ष’ का दिया संदेश
बैठक में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे राइस मिलर्स ने संगठन की एकजुटता पर जोर दिया। इस दौरान ‘एक आवाज, एक संगठन, एक संघर्ष’ का संदेश दिया गया।
अमरजीत छाबड़ा ने कहा कि राइस मिलर्स संगठन के बैनर तले अपनी मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से रखेंगे। सरकार द्वारा मांगों पर सकारात्मक निर्णय लिए जाने के बाद ही आगामी धान सीजन में सीएमआर रजिस्ट्रेशन और धान खरीद को लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सरकारी मापदंडों के अनुसार धान खरीद की मांग
मिलर्स ने मांग की कि खरीद एजेंसियों द्वारा खरीदी जाने वाली धान सरकारी गुणवत्ता मापदंडों के अनुरूप होनी चाहिए। मिलर्स के अनुसार धान में ब्रोकन 25 प्रतिशत से कम, नमी 17 प्रतिशत या उससे कम तथा डैमेज और डिस्कलर 2-2 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके अलावा सरकारी मापदंडों के अनुसार बड़े पंखे से साफ की गई धान की खरीद सुनिश्चित की जानी चाहिए।
दो वर्षों से बोनस लंबित होने का मुद्दा उठाया
बैठक में कहा गया कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद पिछले दो वर्षों से बोनस का भुगतान लंबित है। इसके अलावा धान की लोडिंग-अनलोडिंग चार्ज, कस्टडी एवं मेंटेनेंस चार्ज, बारदाने की डेप्रिसिएशन, पिछले कटे पैसे वापस लेने, धान की ट्रांसपोर्टेशन और चावल के उचित किराये सहित कई मुद्दों का समाधान नहीं हुआ है।
मिलर्स ने मांग की कि इन सभी मामलों पर सरकार तत्काल निर्णय ले।
हाइब्रिड धान में ज्यादा ब्रोकन से मिलर्स परेशान
बैठक में हाइब्रिड धान की गुणवत्ता से जुड़ी समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। मिलर्स ने बताया कि हाइब्रिड धान में 40 से 45 प्रतिशत तक ब्रोकन निकलता है। ऐसे में खरीद एजेंसी को इस प्रकार की धान के संबंध में स्पष्ट नीति बनानी चाहिए, ताकि इसका आर्थिक भार राइस मिलर्स पर न पड़े।
एफसीआई में स्पेस की गंभीर समस्या
मिलर्स ने एफसीआई में स्पेस की कमी को भी गंभीर समस्या बताया। उनका कहना है कि स्पेस की समस्या के कारण प्रदेश के करीब 843 मिलर्स परेशानी का सामना कर रहे हैं।
इसके साथ ही रिशेड्यूलिंग का मुद्दा भी उठाया गया। मिलर्स ने कहा कि यदि चावल लगना जनवरी में शुरू हुआ और एफआरके समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण डिलीवरी में देरी हुई तो रिशेड्यूलिंग की जानी चाहिए। ऐसी परिस्थितियों का अतिरिक्त आर्थिक भार राइस मिलर्स पर नहीं डाला जाना चाहिए।
अन्न दर्पण ऐप और 50 लाख रुपये की एफडी का मुद्दा
बैठक में अन्न दर्पण ऐप से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा राइस मिलर्स के लिए 50 लाख रुपये की एफडी से जुड़े प्रावधान का मुद्दा उठाया गया।
मिलर्स ने सवाल उठाया कि यदि खरीद एजेंसी को स्वयं धान खरीदने का प्रबंध करना है तो 50 लाख रुपये की एफडी की अनिवार्यता का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए।
इसके अलावा जले हुए धान, एफआरके समय पर उपलब्ध नहीं होने के कारण डिलीवरी में देरी और उस पर लगने वाली पेनल्टी का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। मिलर्स का कहना है कि एफआरके समय पर उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में डिलीवरी में देरी के लिए राइस मिलर्स पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं डाला जाना चाहिए।
सीएमआर शेड्यूल और ओटीएस को लेकर भी मांग
राइस मिलर्स ने मांग की कि सीएमआर 25 प्रतिशत, 10 प्रतिशत और 5 प्रतिशत चावल का शेड्यूल पहले ही जारी किया जाए, ताकि मिलर्स आगामी सीजन की बेहतर तैयारी कर सकें।
इसके अलावा ओटीएस को बिना ब्याज के लागू करने की मांग भी उठाई गई। मिलर्स का कहना है कि सरकार नए उद्योग स्थापित करने के लिए सब्सिडी तक देती है, ऐसे में राइस मिलर्स पर अतिरिक्त ब्याज का भार नहीं डाला जाना चाहिए।
प्रदेशभर के मिलर्स ने रखीं समस्याएं
बैठक में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए राइस मिलर्स ने अपनी समस्याएं और मांगें रखीं। इनमें 100 प्रतिशत इंप्रूव्ड राइस, बोनस, धान की लोडिंग-अनलोडिंग चार्ज, कस्टडी एवं मेंटेनेंस चार्ज, बारदाने की डेप्रिसिएशन, पिछले कटे पैसे वापस लेने, धान की ट्रांसपोर्टेशन, चावल का उचित किराया और एफसीआई से जुड़े मामले प्रमुख रहे।
इस मौके पर नरेश कुमार पलवल, संजय जिंदल रतिया, सुखदीप प्रधान रतिया, जस्सी बंसल टोहाना, महाबीर मडोरिया चीका, मुकेश पाहवा बराड़ा, तरसेम गोयल कैथल, अवध बंसल विलासपुर, बजरंग दास फतेहाबाद, आजेश गोयल रादौर, नवीन जैन उकलाना, अरविंद अग्रवाल सढ़ौरा, सतीश सैनी पेहवा, सुमित अग्रवाल शाहाबाद, जितेंद्र गोयल पोला ढांड, पुष्पेंद्र बत्तान पूंडरी, सतबीर बुगालिया भूना, राजेश कंसल इस्माईलाबाद, मनीष बंसल दंगल यमुनानगर, निर्मल सरपंच कूला सहित प्रदेशभर के राइस मिलर्स मौजूद रहे।
मुख्य मांगें एक नजर में
- सीएमआर एक्सटेंशन और लंबित मामलों का समाधान।
- करीब 6 लाख मीट्रिक टन लंबित चावल के मामले का समाधान।
- दो वर्षों से लंबित बोनस का भुगतान।
- धान की लोडिंग-अनलोडिंग, कस्टडी और मेंटेनेंस चार्ज का भुगतान।
- धान की ट्रांसपोर्टेशन और चावल का उचित किराया।
- एफसीआई में पर्याप्त स्पेस की व्यवस्था।
- एफआरके समय पर उपलब्ध करवाना।
- अन्न दर्पण ऐप की समस्याओं का समाधान।
- 50 लाख रुपये की एफडी संबंधी प्रावधान पर पुनर्विचार।
- सीएमआर 25%, 10% और 5% चावल का शेड्यूल पहले जारी करना।
- ओटीएस बिना ब्याज के लागू करना।
- पॉल्यूशन और मार्केट फीस से जुड़े मामलों का समाधान।
फोटो कैप्शन: हरियाणा प्रदेश राइस मिलर्ज एंड डिलर्ज एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा और बैठक में मौजूद राइस मिलर्स सरकार से अपनी मांगों के समाधान की मांग करते हुए।



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