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खरीफ फसलों के एमएसपी में मामूली बढ़ोतरी किसानों के साथ मजाक : सतपाल दिलोंवाली

खरीफ फसलों के एमएसपी में मामूली बढ़ोतरी किसानों के साथ मजाक : सतपाल दिलोंवाली

📍 कैथल | 🗓️ 14 मई 2026

कैथल, 14 मई 2026: भारतीय किसान यूनियन के किसान नेता एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष सतपाल दिलोंवाली ने केंद्र सरकार द्वारा खरीफ फसलों के लिए घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में की गई बढ़ोतरी को किसानों के साथ मजाक बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा धान के एमएसपी में मात्र 72 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे किसानों को लाभ नहीं बल्कि घाटा होगा।

सतपाल दिलोंवाली ने कहा कि केंद्र सरकार दावा कर रही है कि नए एमएसपी से किसानों को 50 प्रतिशत लाभ मिलेगा, लेकिन वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे करती है, जबकि आज भी किसान घाटे में खेती करने को मजबूर है और कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, जबकि अब सरकार किसानों की आय चार गुना या आठ गुना बढ़ने की बात कर रही है। इसके बावजूद किसानों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है और कर्ज के दबाव में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं।

सतपाल दिलोंवाली ने बताया कि धान का बीज बाजार में 30 हजार रुपये से लेकर 60 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है, जबकि सरकार ने धान का एमएसपी ग्रेड-ए के लिए 2,461 रुपये तथा सामान्य धान के लिए 2,441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि बीज कंपनियां अपनी मनमर्जी से कीमतें तय करती हैं, जिससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।

उन्होंने मांग की कि जिस प्रकार सरकार फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करती है, उसी प्रकार बीजों का अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) भी निर्धारित किया जाए, ताकि किसानों को बाजार में अनावश्यक लूट का सामना न करना पड़े।

किसान नेता ने दावा किया कि मौजूदा दरों के अनुसार किसानों को प्रति एकड़ लगभग 7,032 रुपये तथा प्रति क्विंटल करीब 251 रुपये का घाटा होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर फसलों के दाम दिए जाने चाहिए।

सतपाल दिलोंवाली ने कैथल प्रशासन से अपील की कि मानसून से पहले सभी नहरों और ड्रेनों की सफाई करवाई जाए, ताकि संभावित बाढ़ से किसानों की फसलें सुरक्षित रह सकें।

उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन बढ़े हुए एमएसपी का विरोध करती है और सरकार से किसानों को लाभकारी मूल्य देने की मांग करती है, ताकि कोई भी किसान कर्ज के कारण आत्महत्या करने को मजबूर न हो।

“किसान है तो हिंदुस्तान है। जय किसान, लड़ेंगे और जीतेंगे।”

— सतपाल दिलोंवाली, किसान नेता एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष, भारतीय किसान यूनियन

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