कैथल, 29 अक्टूबर 2026। हरियाणा के कैथल की सुप्रसिद्ध कवयित्री एवं साहित्यकार डॉ. मधु गोयल ‘मधुल’ को हरिद्वार के कनखल में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान हिंदी साहित्य के क्षेत्र में निरंतर लेखन तथा हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया। उनकी इस उपलब्धि से कैथल के साहित्यिक जगत में खुशी का माहौल है।
थावे विद्यापीठ और आचार्य कुल के संयुक्त तत्वावधान में 24 और 25 अक्टूबर को परमार्थ ज्ञान मंदिर, कनखल, हरिद्वार में दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य कुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य डॉ. धर्मेंद्र तिवारी ने की, जबकि थावे विद्यापीठ के कुलपति डॉ. विनय पाठक मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर के साहित्यकारों ने लिया भाग
राष्ट्रीय अधिवेशन के पहले सत्र में आचार्य विनोबा भावे के शिक्षा संबंधी विचारों और सिद्धांतों पर विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत किए तथा उनसे जुड़े संकल्प साझा किए। दूसरे सत्र में राष्ट्रीय कवि सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देश के 20 राज्यों से आए कवियों और कवयित्रियों ने काव्य पाठ किया।
कवि सम्मेलन का संचालन थावे विद्यापीठ के उप सचिव एवं व्यवस्था अधिकारी डॉ. अरविंद आनंद ने किया। इस अवसर पर देशभर से आए साहित्यकारों को माला, शॉल, स्मृति चिह्न और सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया गया।
हिंदी साहित्य में योगदान के लिए मिला सम्मान
इसी कड़ी में कैथल, हरियाणा से पहुंचीं सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. मधु गोयल ‘मधुल’ को साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहने, लेखन कार्य करने और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में योगदान देने के लिए साहित्य सम्मान प्रदान किया गया।
अधिवेशन के दूसरे दिन आचार्य कुल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य डॉ. धर्मेंद्र तिवारी ने भी डॉ. मधु गोयल ‘मधुल’ को सम्मान पत्र, शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
आठ पुस्तकें हो चुकी हैं प्रकाशित
डॉ. मधु गोयल ‘मधुल’ हिंदी साहित्य के क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं। उनकी अब तक आठ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साहित्य के प्रति उनके समर्पण और लेखन के लिए उन्हें इससे पहले काशी, अयोध्या, लखनऊ, बोधगया और राजस्थान में भी सम्मानित किया जा चुका है।
हरिद्वार में मिले इस सम्मान के बाद डॉ. मधु गोयल ‘मधुल’ को विभिन्न स्थानों से बधाई संदेश मिल रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि पर कैथलवासियों ने गर्व व्यक्त किया है। यह सम्मान हिंदी साहित्य के प्रति उनके निरंतर योगदान और साहित्यिक सक्रियता को मिली एक महत्वपूर्ण पहचान है।

