कैथल, 25 जुलाई 2026। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] ने पेपर लीक मामलों के खिलाफ संघर्ष करने वाले देशभर के छात्रों और युवाओं को बधाई देते हुए इसे लोकतंत्र की महत्वपूर्ण जीत बताया है। पार्टी ने कहा कि छात्रों के अटूट संकल्प, संघर्ष और बलिदान के आगे सरकार को झुकना पड़ा।
सीपीआई(एम) हरियाणा के राज्य सचिव प्रेम चंद तथा कैथल के कार्यवाहक जिला सचिव जयप्रकाश शास्त्री ने संयुक्त प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि पेपर लीक की घटनाओं के कारण अनेक छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ और 22 छात्रों ने दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन को समाज के विभिन्न वर्गों का समर्थन मिला और प्रशासनिक दमन, लाठीचार्ज तथा अन्य कार्रवाई के बावजूद युवाओं ने अपना संघर्ष जारी रखा।
पार्टी नेताओं ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का वे स्वागत करते हैं, लेकिन केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले पेपर लीक मामलों के लिए जिम्मेदार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को भी भंग किया जाना चाहिए और परीक्षा प्रणाली का विकेंद्रीकरण किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
सीपीआई(एम) ने अपने बयान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 को भी रद्द करने की मांग दोहराई। पार्टी का आरोप है कि यह नीति शिक्षा के व्यावसायीकरण, केंद्रीकरण और सांप्रदायिकीकरण को बढ़ावा देती है। नेताओं का कहना है कि जब तक शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार नहीं किए जाएंगे, तब तक पेपर लीक जैसी घटनाएं और छात्रों के अधिकारों का हनन जारी रहेगा।
प्रेम चंद और जयप्रकाश शास्त्री ने उम्मीद जताई कि छात्र और युवा भविष्य में भी शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे।
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