बदलते वैश्विक परिदृश्य में स्वदेशी का महत्व विषय पर गोष्ठी आयोजित
कैथल। पंचनद शोध एवं अध्ययन केन्द्र, कैथल द्वारा स्वामी विवेकानंद जिला पुस्तकालय में “बदलते वैश्विक परिदृश्य में स्वदेशी का महत्व” विषय पर मासिक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में स्वदेशी जागरण मंच के विभाग संगठक ताराचंद ने विषय प्रस्तोता के रूप में अपने विचार रखे।
ताराचंद ने कहा कि स्वदेशी केवल एक आर्थिक नीति नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में स्थानीय उत्पादों, कुटीर एवं लघु उद्योगों तथा भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी के माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित होते हैं। उन्होंने युवाओं से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
गोष्ठी में उपस्थित विद्वानों एवं शोधकर्ताओं ने भी विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि वैश्वीकरण के इस युग में स्वदेशी की अवधारणा पहले से अधिक प्रासंगिक हो गई है और यह भारत को आर्थिक एवं सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
इस अवसर पर पंचनद शोध एवं अध्ययन केन्द्र के निदेशक डॉ. कृष्ण पांडेय, अतिरिक्त प्रांत समन्वयक डॉ. गोविंद बल्लभ, राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार भांभू, पंचनद जिलाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार अत्री, सचिव डॉ. मोनिका जाखड़, डॉ. राकेश मित्तल, डॉ. सोहन लाल, कुलदीप चंद, डॉ. रामानंद मिश्र सहित अनेक शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में संस्थान की ओर से मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया गया तथा उपस्थित सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।


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