सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर छह गांवों में आयोजित हुए प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर, किसानों को दी गई वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी
कैथल। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा केंद्र सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे जन जागरूकता अभियान के तहत शुक्रवार को जिले के छह गांवों डोहर, कैलरम, कुराड़, ग्योंग, नरड़ और सेरधा में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया गया। शिविरों में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी प्राप्त की।
इन प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन उपनिदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग डॉ. रविंद्र हुड्डा के मार्गदर्शन तथा उपमंडल कृषि अधिकारी (कैथल) डॉ. सतीश कुमार नारा के नेतृत्व में किया गया।
लागत कम कर किसानों की आय बढ़ाना सरकार का उद्देश्य
डॉ. सतीश कुमार नारा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य खेती की लागत को कम करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में किसानों के हित में अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका लाभ किसानों को मिल रहा है।
उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अनुदान तथा विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी साबित हो रही हैं।
रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से बचने की अपील
डॉ. नारा ने किसानों से रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से बचने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लगातार रसायनों के उपयोग से भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है तथा इसका पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती इन समस्याओं का प्रभावी और टिकाऊ समाधान है, जिससे खेती को अधिक लाभकारी और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।
प्राकृतिक खेती की तकनीकों का दिया प्रशिक्षण
प्रशिक्षण शिविरों के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत के निर्माण एवं उपयोग, आच्छादन (मल्चिंग), प्राकृतिक कीट प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण तकनीकों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि इन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन लागत कम की जा सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग कर रहा कार्य
उपनिदेशक कृषि एवं किसान कल्याण विभाग डॉ. रविंद्र हुड्डा ने अपने संदेश में कहा कि कैथल जिला प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान कम लागत में गुणवत्तापूर्ण और रसायन मुक्त खाद्यान्न का उत्पादन कर सकते हैं।
उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य जिले के प्रत्येक गांव तक प्राकृतिक खेती की जानकारी पहुंचाकर अधिक से अधिक किसानों को इस अभियान से जोड़ना है।
किसानों ने लिया प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प
शिविर के अंत में उपस्थित किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प लिया और अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती की शुरुआत करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर विभाग के कृषि अधिकारी, तकनीकी कर्मचारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, सरपंच तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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