प्राकृतिक खेती अपनाएं किसान, भविष्य में बीमारियों से मिलेगा छुटकारा : डॉ. सतीश नारा
विभिन्न गांवों में आयोजित प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविर में किसानों को दी गई जैविक एवं प्राकृतिक खेती की जानकारी
कैथल। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा सरकार के सफल 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे विशेष जागरूकता अभियान के तहत जिले के विभिन्न गांवों में एक दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया गया। इन शिविरों में किसानों को प्राकृतिक खेती के लाभ और आधुनिक कृषि में इसके महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
यह प्रशिक्षण शिविर गांव भाणा, साकरा, खेड़ी रायवली, जसवंती, टीक, कसान, सोथा, थेह नेवल, बदसूई और बबकपुर में आयोजित किए गए। कार्यक्रम का आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र हुड्डा के मार्गदर्शन तथा उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सतीश कुमार नारा के नेतृत्व में किया गया।
सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कर रही प्रयास
शिविर की अध्यक्षता करते हुए उपमंडल कृषि अधिकारी डॉ. सतीश कुमार नारा ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना से लेकर प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार के अनुदान और प्रोत्साहन राशि उपलब्ध करवाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य किसानों की खेती की लागत को कम करना और उनकी आय में वृद्धि करना है। प्राकृतिक खेती अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।
रासायनिक खेती से बढ़ रही हैं समस्याएं
खंड कृषि अधिकारी डॉ. जगबीर सिंह लांबा ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक खादों और कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से भूमि की उर्वरक क्षमता लगातार कम हो रही है।
उन्होंने कहा कि रसायनों के अंधाधुंध उपयोग से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता प्रभावित होती है और विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है। ऐसी स्थिति में प्राकृतिक खेती एक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प बनकर सामने आई है।
प्राकृतिक खेती के महत्वपूर्ण पहलुओं की दी जानकारी
शिविर के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रमुख घटकों जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, आच्छादन (मल्चिंग) तथा प्राकृतिक कीट प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने किसानों को व्यावहारिक तरीके से समझाया कि किस प्रकार कम लागत में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके बेहतर खेती की जा सकती है और भूमि की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखा जा सकता है।
किसानों ने लिया प्राकृतिक खेती अपनाने का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में कृषि अधिकारियों ने किसानों की विभिन्न शंकाओं का समाधान किया और प्राकृतिक खेती से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान की।
शिविर में उपस्थित प्रगतिशील किसानों ने अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती शुरू करने का संकल्प लिया तथा अन्य किसानों को भी इसके लिए प्रेरित करने का निर्णय लिया।
इस अवसर पर विभाग के तकनीकी अधिकारी, स्थानीय सरपंच, ग्रामीण प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।


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