आबादकार पट्टेदारों की बोली पर रोक लगाए सरकार, अन्यथा होगा आंदोलन : जसबीर सिंह
कैथल, 15 मई 2026: अखिल भारतीय किसान सभा, हरियाणा की कैथल इकाई ने सरकार से आबादकार पट्टेदार किसानों की जमीनों की खुली बोली पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
किसान सभा के जिला प्रधान जसबीर सिंह और जिला उपप्रधान जसपाल सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सरकार एक ओर पट्टेदार किसानों को मालिकाना हक देने की बात करती है, जबकि दूसरी ओर जिला प्रशासन उनकी जमीनों की खुली बोली करवा कर उन्हें उजाड़ने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कई किसानों की लीज राशि अत्यधिक बढ़ाकर उन्हें बेदखल करने की कोशिश की जा रही है। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भुना गांव के एक किसान की 3 एकड़ 1 मरला जमीन की बोली लगभग 70 हजार रुपये प्रति एकड़ प्रतिवर्ष तय की गई, जबकि साथ लगती जमीन की लीज मात्र 5 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से तय हुई।
किसान सभा ने मांग की कि भुना गांव की प्रस्तावित बोली पर तत्काल रोक लगाई जाए। संगठन ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो प्रशासन के खिलाफ व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा।
जसबीर सिंह ने बताया कि गांव सरोला (चीका) क्षेत्र में हांसी-बुटाना नहर के घग्गर नदी पर बने साइफन के नीचे हर वर्ष मिट्टी और गाद जमा हो जाती है, जिससे बरसात के दिनों में पानी की निकासी बाधित हो जाती है और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
उन्होंने कहा कि साइफन की सफाई का कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन घग्गर बांध की मजबूती, हांसी-बुटाना नहर की मरम्मत और घग्गर नदी की चौड़ाई बढ़ाने जैसे आवश्यक कार्य भी समय रहते किए जाने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी को सुरक्षित रूप से अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाया जा सके।
किसान नेताओं ने कहा कि यदि मानसून से पहले आवश्यक प्रबंध नहीं किए गए तो किसान सभा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
उन्होंने बताया कि आगामी दिनों में कृषि विपणन पर राष्ट्रीय नीति फ्रेमवर्क को रद्द करवाने, स्मार्ट मीटर योजना वापस लेने, एमएसपी की कानूनी गारंटी, किसान-मजदूरों की कर्जमाफी और अन्य लंबित मांगों को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी।
किसान सभा ने हरियाणा सरकार पर सरकारी कृषि मंडियों के निजीकरण, कॉर्पोरेट खेती को बढ़ावा देने, कृषि उत्पादों के असीमित भंडारण की अनुमति देने तथा स्मार्ट मीटर योजना के माध्यम से निजी बिजली कंपनियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया।
जसबीर सिंह ने कहा कि जिन तीन कृषि कानूनों को किसानों ने अपने संघर्ष से वापस करवाया था, सरकार उन्हें नई नीतियों के माध्यम से दोबारा लागू करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि नई कृषि बाजार नीति को रद्द नहीं किया गया और किसानों की मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो कैथल में बड़ा आक्रोश प्रदर्शन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
जारीकर्ता:
जसबीर सिंह, जिला प्रधान
अखिल भारतीय किसान सभा, कैथल
मोबाइल: 8708520282


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