“सच की आवाज़, हर दिन आपके साथ”

Advertisement

कैथल में कृषि विभाग की बैठक: निदेशक अमित खत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश, मल्चर की जानकारी न देने पर नोटिस

कैथल में कृषि विभाग की बैठक: निदेशक अमित खत्री ने अधिकारियों को दिए निर्देश, मल्चर की जानकारी न देने पर नोटिस

किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ तय समय-सीमा में पहुंचाने पर जोर, पराली प्रबंधन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश

कैथल, 4 नवंबर। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के निदेशक अमित खत्री ने बुधवार को कैथल के लघु सचिवालय स्थित सभागार में कृषि विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और किसानों के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने विभागीय योजनाओं की प्रगति, किसानों की समस्याओं, फसलों के उत्पादन, खाद की उपलब्धता, सब्सिडी और फसल अवशेष प्रबंधन सहित विभिन्न कृषि संबंधी मुद्दों की समीक्षा की।

निदेशक अमित खत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि वे कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उद्देश्य के अनुरूप किसान कल्याण की भावना से कार्य करें। सरकार और विभाग की ओर से संचालित योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक निर्धारित समय-सीमा में पहुंचना चाहिए, ताकि योजनाओं का वास्तविक लाभ मिले और किसानों की आय में बढ़ोतरी हो सके।

राजौंद में मल्चर की कमी पर सहायक कृषि अभियंता को कारण बताओ नोटिस

बैठक के दौरान निदेशक अमित खत्री ने किसानों से विभिन्न फसलों के उत्पादन और बिक्री में आने वाली परेशानियों के बारे में जानकारी ली। राजौंद क्षेत्र में मल्चर उपकरणों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। इस संबंध में सहायक कृषि अभियंता की ओर से दी गई जानकारी से असंतुष्ट होने पर निदेशक ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कृषि उपकरणों की उपलब्धता और उनके उपयोग से जुड़ी सही जानकारी समय पर उपलब्ध करवाई जाए, ताकि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन में परेशानी न हो।

पराली जलाने की बजाय प्रबंधन करने के लिए किसानों को करें जागरूक

निदेशक अमित खत्री ने जिले में पराली प्रबंधन की स्थिति की समीक्षा करते हुए कहा कि किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि और अन्य सुविधाओं की जानकारी अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाई जाए।

उन्होंने कहा कि किसानों को जागरूक किया जाए कि वे धान की पराली में आग न लगाएं। यदि जागरूकता के बावजूद कोई किसान पराली जलाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों को पराली जलाने की घटनाओं के कारणों की गहनता से जांच करने के निर्देश भी दिए।

अमित खत्री ने कहा कि पराली किसानों के लिए आय का साधन बन सकती है। ऐसे में किसान इसका उचित प्रबंधन करें और इसे जलाने से बचें।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर, मिट्टी-पानी की जांच करवाने की अपील

बैठक में निदेशक ने किसानों के साथ प्राकृतिक खेती को लेकर विस्तार से चर्चा की और इसे बढ़ावा देने के लिए सुझाव लिए। उन्होंने जिले में प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे अपनी कृषि भूमि की मिट्टी और पानी की जांच अवश्य करवाएं, ताकि जमीन की गुणवत्ता के अनुसार फसल उत्पादन की योजना बनाई जा सके।

गेहूं, धान, गन्ना और अन्य फसलों के उत्पादन की समीक्षा

बैठक में जिले में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलों गेहूं, धान और गन्ने के साथ नई फसलों के उत्पादन की भी समीक्षा की गई। इसके अलावा खाद की उपलब्धता, विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत दी जाने वाली सब्सिडी तथा दलहनी और तिलहनी फसलों के उत्पादन से संबंधित आंकड़ों पर चर्चा हुई।

निदेशक ने कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से विभाग की आवश्यकताओं के संबंध में रिपोर्ट भी तलब की। उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए बैठक में आए सुझावों पर सकारात्मकता के साथ विचार किया जाएगा।

कृषि विभाग की नई शाखाओं का किया उद्घाटन

बैठक के बाद निदेशक अमित खत्री ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग कार्यालय में नवनिर्मित स्थापना शाखा और तकनीकी शाखा के जीर्णोद्धार कार्य का उद्घाटन किया। उन्होंने कार्यालय का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा भी लिया।

इस अवसर पर कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. राम प्रताप सिहाग, संयुक्त निदेशक डॉ. देवेंद्र सिहाग, प्रदीप, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक डॉ. रविंद्र जाखड़ सहित विभाग के अन्य अधिकारी, कर्मचारी और किसान मौजूद रहे।