कैथल, 2 सितंबर 2026। कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर बिजली विभाग के निजीकरण की तैयारी करने का गंभीर आरोप लगाया है। हरियाणा विधानसभा के अंतिम दिन शून्य काल के दौरान बिजली के प्रस्तावित निजीकरण को लेकर उन्होंने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने गुड़गांव और नूंह में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव का विरोध करते हुए इसे बिजली विभाग के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
4717 करोड़ रुपये के बिजली प्रोजेक्ट पर आदित्य सुरजेवाला ने उठाए सवाल
आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि बिजली विभाग की ओर से गुड़गांव और नूंह में समानांतर लाइसेंस देने के लिए याचिका दायर की गई है। उनके अनुसार, संबंधित कंपनी करीब एक साल पुरानी है और उसके पास बिजली वितरण का कोई अनुभव नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कंपनी की पूंजी महज एक करोड़ रुपये है, जबकि उसे 4717 करोड़ रुपये का बिजली प्रोजेक्ट सौंपने की तैयारी की जा रही है।
विधायक ने सवाल उठाया कि इतनी कम पूंजी और बिना बिजली वितरण अनुभव वाली कंपनी को इतना बड़ा प्रोजेक्ट सौंपना क्या भ्रष्टाचार का संकेत नहीं है।
मॉल और बड़ी सोसाइटियों तक सीमित रहेगा बिजली वितरण?
आदित्य सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित निजी कंपनी का फोकस मॉल, बड़ी इंडस्ट्री और बड़ी आवासीय सोसाइटियों को बिजली उपलब्ध कराने तक सीमित रहेगा। उन्होंने कहा कि गांवों, ट्यूबवेलों और नारनौल-रेवाड़ी क्षेत्र की छोटी दुकानों जैसे उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
उन्होंने इसे बिजली अधिनियम में निर्धारित सार्वभौमिक आपूर्ति दायित्व के खिलाफ बताते हुए कहा कि चुनिंदा उपभोक्ताओं को बिजली वितरण का अधिकार देना निजीकरण का रास्ता खोलने जैसा है।
‘मुनाफा निजी कंपनी को और घाटा जनता को’
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि सरकार की इस व्यवस्था में मुनाफा निजी कंपनी को मिलेगा, जबकि घाटे का बोझ आम जनता पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि गुड़गांव दक्षिणी हरियाणा बिजली वितरण निगम के राजस्व में करीब 40 प्रतिशत योगदान देता है।
उनके मुताबिक, यदि बिजली वितरण का यह महत्वपूर्ण हिस्सा निजी कंपनी के पास चला गया तो सरकारी बिजली निगम की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसका असर किसानों के नए ट्यूबवेल कनेक्शन, गांवों में खराब ट्रांसफॉर्मर बदलने और किसानों तथा गरीब उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली सब्सिडी पर पड़ने की आशंका है।
‘निजी लाइसेंस बिजली निगम की बिक्री की पहली सीढ़ी’
आदित्य सुरजेवाला ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में सरकारी बिजली निगम घाटे में जाता है तो सरकार उसके निजीकरण या बिक्री का तर्क दे सकती है। उन्होंने प्रस्तावित निजी लाइसेंस को इसी दिशा में उठाया गया कदम बताया।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया से हजारों सरकारी नौकरियों पर भी खतरा पैदा हो सकता है। विधायक ने भाजपा सरकार से मांग की कि गुड़गांव और नूंह में प्रस्तावित समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को तत्काल रद्द किया जाए।
भाजपा सरकार से लाइसेंस रद्द करने की मांग
आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि बिजली व्यवस्था आम जनता, किसानों और छोटे दुकानदारों की जरूरतों को ध्यान में रखकर संचालित होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से प्रस्तावित बिजली लाइसेंस को तुरंत रद्द करने और बिजली विभाग के निजीकरण की किसी भी कोशिश को रोकने की मांग की।


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