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हरियाणा में लिंगानुपात 8 साल के निचले स्तर पर पहुंचने का दावा, सुरजेवाला ने सरकार पर साधा निशाना

कैथल। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हरियाणा में घटते लिंगानुपात को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने विधानसभा में पेश आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि हरियाणा का लिंगानुपात वर्ष 2025 के 923 के मुकाबले वर्ष 2026 के पहले छह महीनों में घटकर 900 प्रति 1,000 लड़कों पर रह गया है। सुरजेवाला ने इसे पिछले आठ वर्षों का सबसे निचला स्तर बताया है।

सुरजेवाला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि प्रदेश में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा विज्ञापनों और आयोजनों तक सीमित रह गया है, जबकि जमीनी स्तर पर बेटियों की संख्या में गिरावट चिंता का विषय है। उन्होंने प्रदेश सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर भी सवाल उठाए।

चरखी दादरी में लिंगानुपात सबसे कम होने का दावा

सुरजेवाला के अनुसार, चरखी दादरी जिले में लिंगानुपात में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है। उन्होंने दावा किया कि यहां लिंगानुपात 913 से गिरकर 829 प्रति 1,000 लड़कों पर पहुंच गया है, जो प्रदेश में सबसे निचला स्तर है।

उन्होंने पानीपत, पंचकूला और जींद जिलों के आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक पानीपत में लिंगानुपात 951 से घटकर 880, पंचकूला में 971 से 903 और जींद में 918 से घटकर 878 रह गया है।

बाल अधिकार संरक्षण आयोग में पद खाली होने पर सवाल

कांग्रेस नेता ने हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की स्थिति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि आयोग में छह सदस्यों के पद दिसंबर 2025 से खाली पड़े हैं। साथ ही उन्होंने आयोग की अलग वेबसाइट नहीं होने का भी मुद्दा उठाया।

सुरजेवाला ने कहा कि जिस हरियाणा से वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की शुरुआत की थी, उसी प्रदेश में बेटियों से जुड़े आंकड़ों में गिरावट सरकार की नीतियों और उनके क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करती है।

सरकार की नीतियों पर उठाए सवाल

सुरजेवाला ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और जन्म से जुड़े मुद्दों पर केवल प्रचार और कार्यक्रमों के बजाय ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि उन्हें हरियाणा आने का समय मिले तो वे प्रदेश की नीतियों की स्थिति और बेटियों के हालात की वास्तविकता जान सकेंगे।

सुरजेवाला द्वारा जारी आंकड़ों और आरोपों पर सरकार की ओर से इस बयान के संबंध में कोई प्रतिक्रिया इस खबर के तैयार होने तक सामने नहीं आई है।

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