कैथल, 10 अगस्त। महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय एवं भारतीय शिक्षण मण्डल के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के टीक परिसर में सोमवार को प्रातः 10 बजे व्यास पूजा कार्यक्रम का गरिमामयी आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने की, जबकि भारतीय शिक्षण मण्डल के अखिल भारतीय मण्डल कार्य विभाग प्रमुख डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. संजय गोयल तथा अधिष्ठाता शैक्षणिक डॉ. जगत नारायण कौशिक की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।
यथार्थ ज्ञान से बढ़ता है बुद्धि और विवेक का स्तर : आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने कहा कि यथार्थ ज्ञान से मनुष्य की बुद्धि और विवेक का स्तर बढ़ता है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विद्या को केवल आजीविका का साधन नहीं माना गया, बल्कि इसे मुक्ति की साधिका के रूप में देखा गया है।
उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण विशेषता बताते हुए ज्ञान के साथ संस्कार और जीवन मूल्यों के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार : डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज
मुख्य वक्ता डॉ. जितेन्द्र भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। उन्होंने प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक गुरु-शिष्य परंपरा से जुड़े अनेक ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक संदर्भ प्रस्तुत किए और इसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में गुरु केवल विषय का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि शिष्य के व्यक्तित्व निर्माण और जीवन को सही दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी रहे उपस्थित
कार्यक्रम के संयोजन का दायित्व व्याकरण विभाग के सह आचार्य डॉ. सुरेन्द्र पाल वत्स ने निभाया, जबकि कार्यक्रम का सफल संचालन व्याकरण विभाग की अध्यक्षा डॉ. शर्मिला ने किया।
इस अवसर पर भारतीय शिक्षण मण्डल के कैथल जिला संयोजक डॉ. महेश कुमार एवं डॉ. अजय उपस्थित रहे। विश्वविद्यालय की ओर से वित्ताधिकारी श्री कृष्ण कुमार भारती, हिन्दू अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, वेद विभागाध्यक्ष डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा, योग विभाग प्रभारी डॉ. रामानन्द मिश्र, जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ सहित डॉ. नवीन शर्मा, डॉ. चन्द्रकान्त, डॉ. हरीश कुमार, डॉ. सविता, डॉ. रमाशंकर, डॉ. कुलदीप और श्री रोहित मौजूद रहे।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए। व्यास पूजा कार्यक्रम के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व को रेखांकित किया गया।



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