

कैथल, 28 जुलाई। गुरु पूर्णिमा (व्यास पूर्णिमा) के पावन अवसर पर कैथल स्थित महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के टीक परिसर में “गुरु-शिष्य परम्परा” विषय पर विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. भीमराव अंबेडकर महाविद्यालय, कैथल के प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार भाम्भू उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. संजय गोयल, शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक तथा परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला सहित विश्वविद्यालय के अनेक अधिकारी, प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विद्यार्थियों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि डॉ. मनोज कुमार भाम्भू ने कहा कि गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति का अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जो केवल गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर नहीं बल्कि भारतीय ज्ञान परम्परा के मूल्यों को आत्मसात करने का भी संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गुरु ही व्यक्ति के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है।
कुलसचिव प्रो. संजय गोयल ने अपने संबोधन में कहा कि सच्चा गुरु अपने आचरण और व्यवहार से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है। वहीं शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. जगत नारायण कौशिक ने कहा कि गुरु मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाला
परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला ने कहा कि गुरु केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह जीवन के व्यावहारिक अनुभव, संस्कार और नैतिक मूल्यों का भी संचार करता है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने कहा कि भारतीय गुरु-शिष्य परम्परा विश्व की सबसे समृद्ध ज्ञान परम्पराओं में से एक है। उन्होंने कहा कि एक सच्चा गुरु योग्य एवं जिज्ञासु शिष्य को पहचानकर उसका मार्गदर्शन करता है और उसे आत्मसाक्षात्कार तक पहुँचाने का कार्य करता है।
उन्होंने आधुनिक एवं पारम्परिक शिक्षा पद्धतियों की चर्चा करते हुए कहा कि अध्यापक से गुरु बनने की यात्रा ही भारतीय शिक्षा-दर्शन का वास्तविक उद्देश्य है।
कार्यक्रम का संयोजन महर्षि वाल्मीकि शोध पीठ के संयोजक डॉ. हरीश कुमार ने किया, जबकि मंच संचालन भारतीय ज्ञान परम्परा शोध एवं प्रशिक्षण केन्द्र के संयोजक डॉ. नवीन शर्मा ने किया।
इस अवसर पर वित्ताधिकारी श्री कृष्ण कुमार भारती, वरिष्ठ आचार्य डॉ. सुरेन्द्र पाल वत्स, विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश शर्मा, डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डेय, डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, डॉ. शर्मिला, डॉ. रामानन्द मिश्र, जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. गोविन्द वल्लभ, डॉ. चन्द्रकान्त, डॉ. रमाशंकर, डॉ. सत्येन्द्र गौतम, श्री रोहित सहित विश्वविद्यालय परिवार के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
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