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कैथल में इस्कॉन प्रचार समिति की श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन: भगवान श्रीकृष्ण ही सभी जीवों के सच्चे हितैषी हैं – साक्षी गोपाल दास

कैथल, 4 जुलाई। इस्कॉन प्रचार समिति, कैथल द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा व्यास श्रीमन साक्षी गोपाल दास जी महाराज ने श्रीमद्भागवतम् के सप्तम स्कंध का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की करुणा, भक्तिभाव और भागवत श्रवण के महत्व से अवगत कराया।

कथा के दौरान उन्होंने कहा कि इस संकैथल में इस्कॉन प्रचार समिति की श्रीमद्भागवत कथा का तीसरा दिन: भगवान श्रीकृष्ण ही सभी जीवों के सच्चे हितैषी हैं – साक्षी गोपाल दाससार में भगवान के अतिरिक्त हमारा कोई वास्तविक हितैषी नहीं है। भगवान ही सभी जीवों के सच्चे शुभचिंतक हैं और बिना किसी भेदभाव के संपूर्ण सृष्टि का पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि जैसे एक पिता अपने बच्चों पर स्नेह लुटाता है, उसी प्रकार भगवान सभी प्राणियों की आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। पृथ्वी, जल, आकाश, सूर्य, चंद्रमा और समस्त सृष्टि भगवान की ही देन है।

कथा व्यास ने कहा कि संसार की सभी वस्तुओं के वास्तविक भोक्ता केवल भगवान श्रीकृष्ण हैं। भगवान सभी जीवों के प्रति समान भाव रखते हैं, किसी से ईर्ष्या नहीं करते और न ही किसी से भयभीत होते हैं। उन्होंने अनेक उदाहरणों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान के दिव्य स्वरूप और उनके निष्पक्ष स्वभाव का सरलता से वर्णन किया।

उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा श्रवण को जीवन का सर्वोत्तम सत्कर्म बताते हुए कहा कि चार कुमारों ने भी भागवत महात्म्य में इसके श्रवण को सबसे बड़ा पुण्य बताया है। उन्होंने प्रेरणा देते हुए कहा कि जैसे भूख लगने पर व्यक्ति सभी कार्य छोड़कर भोजन करता है, उसी प्रकार हजारों कार्य छोड़कर भी श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।

कथा में श्रीला शुकदेव गोस्वामी और महाराज परीक्षित के संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान जिनका वध भी करते हैं, उन्हें भी अपने वैकुंठ धाम का स्थान प्रदान करते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने पूतना, हिरण्याक्ष, हिरण्यकश्यप और शिशुपाल जैसे प्रसंगों का उल्लेख किया।

उन्होंने प्रकृति के तीन गुण—सत्त्व, रज और तम—का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सत्त्वगुण की वृद्धि से देवताओं और ऋषियों का प्रभाव बढ़ता है, रजोगुण से असुरों की तथा तमोगुण से यक्ष और राक्षसों की वृद्धि होती है। इन तीनों गुणों का संचालन काल करता है, जो भगवान श्रीकृष्ण की संकल्प शक्ति का ही स्वरूप है।

प्रेस सचिव भारत मदान ने बताया कि कथा के यजमान श्री मोहन लाल गुप्ता, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मनदीप सिंह, श्री रमन सचदेवा, डॉ. विवेक गर्ग (नारायण सेवा संस्थान), श्री दुर्गा प्रसाद तथा श्री ज्ञानचंद ने दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया तथा कथा व्यास का पुष्पमालाओं से सम्मान किया। कथा के समापन पर भगवान की आरती भी उतारी गई।

इस अवसर पर दशरथी चरण दास, राधा ऋषिकेश दास, रामभद्र केशव दास, महाभानु मुरारी दास, संजय सखा दास, भास्कर धाम दास, ऐन्द्रा जीवन दास, सचि दुलाल दास, भीमा अभय दास, राम्या पलका दास सहित इस्कॉन प्रचार समिति के सभी सदस्य एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

इस्कॉन प्रचार समिति ने कैथल शहर के सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे प्रतिदिन समय पर कथा स्थल पर पहुंचकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करें, भगवान का प्रसाद ग्रहण करें और अपने जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाएं।

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