“सच की आवाज़, हर दिन आपके साथ”

Advertisement

कबीर जी के विचारों को आत्मसात करना समय की आवश्यकता : हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति

कैथल, 30 जून। हरियाणा ज्ञान विज्ञान समिति, कैथल एवं सद्भावना साहित्य सदन के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय भगत सिंह भवन में संत कबीर जयंती के अवसर पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के जिला अध्यक्ष अमृत लाल सीवन ने की, जबकि संचालन डॉ. विकास आनंद ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए डॉ. विकास आनंद ने कहा कि भक्ति काल में जब समाज अंधविश्वास, पाखंड और रूढ़िवादी सोच से घिरा हुआ था, तब संत कबीर ने अपनी निर्भीक वाणी, दोहों और विचारों के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और वैज्ञानिक सोच का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कबीर के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं और उन्हें आत्मसात करने की आवश्यकता है।

इस अवसर पर मास्टर गोपाल दास आनंद ने कबीर के प्रसिद्ध दोहों और भजनों का गायन करते हुए उनके सामाजिक संदेशों को प्रस्तुत किया। उन्होंने “गुरु गोविंद दोऊ खड़े…”, “ऐसी बाणी बोलिए…” तथा “माला फेरत जग मुआ…” जैसे दोहों के माध्यम से संत कबीर की विचारधारा पर प्रकाश डाला।

दिलबाग अकेला ने कहा कि संत कबीर ने अपनी वाणी से समाज की हर कुरीति पर प्रहार किया और विश्व शांति, भाईचारे तथा अंधविश्वास से मुक्ति का संदेश दिया। उन्होंने अपनी हरियाणवी रचना के माध्यम से आजादी, सामाजिक चेतना और भ्रम से दूर रहने का आह्वान किया।

अध्यापक विपिन कालड़ा ने कहा कि ज्ञान विज्ञान समिति हर विषय को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से परखने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा कि संत कबीर केवल भक्त कवि ही नहीं, बल्कि तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था पर प्रश्न उठाने वाले क्रांतिकारी चिंतक भी थे।

कार्यक्रम में ओपी सोलरा, संजय पाई, भरत पाल, मास्टर राजेश सिंहमार, कामरेड सत्यवान तथा धर्मपाल पाई ने भी अपने विचार रखते हुए कबीर के दोहों की सामाजिक और मानवीय व्याख्या की।

प्राध्यापक गुरदेव तथा सोहनलाल गोहरां ने कहा कि आज समाज में कथनी और करनी के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान माहौल में लोग खुलकर अपनी बात रखने से भी डरते हैं। ऐसे समय में संत कबीर के निर्भीक विचार समाज को नई दिशा दे सकते हैं और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की प्रेरणा देते हैं।

जयप्रकाश शास्त्री ने कहा कि आज संत कबीर के विचारों की प्रासंगिकता पहले से अधिक बढ़ गई है। उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाकर समाज को जागरूक करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

अध्यक्षीय संबोधन में अमृत लाल सीवन ने कहा कि वर्तमान समय में संत कबीर की समतामूलक और मानवीय सोच को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिगामी ताकतें योजनाबद्ध तरीके से कबीर के विचारों को पीछे धकेल रही हैं, जबकि समाज को संविधान, धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और सामाजिक न्याय की भावना के साथ आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से वैज्ञानिक सोच अपनाने और सामाजिक एकता को मजबूत करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में जसबीर सिंह, रमेश हरित, नरेश रोहेड़ा, रमेश फर्श माजरा, सावित्री, राजेश भुक्कल सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *