

जिला कैथल के संयुक्त तत्वावधान में बाल्मीकि बस्ती स्थित निःशुल्क शिक्षा केंद्र में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (SDG-4) ‘गुणवत्तापूर्ण शिक्षा’ विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के महत्व को जन-जन तक पहुंचाना तथा सभी बच्चों के लिए समावेशी एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
ग्रुप लीडर बख्शीश गिरधर ने बताया कि ‘स्वस्थ बालिका-स्वस्थ भारत अभियान’ के अंतर्गत संचालित निःशुल्क शिक्षा केंद्र में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य-4 का उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को समान अवसर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना तथा आजीवन सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर जिला संगठन आयुक्त (स्काउट) विजय टांक ने कहा कि शिक्षा ही गरीबी उन्मूलन और सतत विकास के सभी लक्ष्यों को प्राप्त करने की सबसे महत्वपूर्ण कुंजी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है जब विद्यालयों में बिजली, स्वच्छ पेयजल, लड़के-लड़कियों के लिए अलग शौचालय तथा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि भारत सरकार की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, कौशल आधारित और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इंडियन स्काउट एंड गाइड फैलोशिप की सदस्य विजेता बुरा, ममता वधवा और सुमन ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा कि शिक्षा केवल पुस्तक ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सोचने, प्रश्न पूछने, आत्मनिर्भर बनने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति प्रदान करती है। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा को समाज के विकास की आधारशिला बताया।
कार्यक्रम के समापन पर ‘स्वस्थ बालिका-स्वस्थ भारत अभियान’ के 75वें माह के अवसर पर बाल्मीकि बस्ती की 35 जरूरतमंद बालिकाओं को आगामी तीन माह के लिए निःशुल्क सेनेटरी नेपकिन वितरित किए गए, ताकि मासिक धर्म के दौरान भी उनकी शिक्षा बाधित न हो।
इस अवसर पर रोवर सुनील चौधरी, ममता रानी, विजेता बुरा, सुमन, शिक्षा केंद्र की अध्यापिका कविता सैनी तथा पूनम सैनी सहित अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सराहनीय योगदान दिया।

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