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कैथल राष्ट्रीय लोक अदालत में 13,260 मामलों का निपटारा, 9.30 करोड़ रुपये से अधिक के मामलों का समाधान

कैथल, 12 सितंबर। कैथल के न्यायिक परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। लोक अदालत में विभिन्न न्यायालयों के 26,842 लंबित मामले सुनवाई के लिए रखे गए, जिनमें से 13,260 मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों से संबंधित कुल 9 करोड़ 30 लाख 97 हजार 907 रुपये की राशि का भी समाधान हुआ।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कैथल के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में आपसी सहमति के आधार पर विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा किया गया। इनमें आपराधिक मामले, एनआई एक्ट, बैंक रिकवरी, मोटर वाहन दुर्घटना, श्रम विवाद, राजस्व तथा अन्य मामलों को शामिल किया गया।

कैथल में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन

राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कैथल की अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश कंचन माही की देखरेख में किया गया।

लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मामलों का अधिक से अधिक संख्या में सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर आमजन को त्वरित, सस्ता और सुलभ न्याय उपलब्ध करवाना रहा। मामलों की सुनवाई और निपटारे के लिए न्यायिक अधिकारियों की अध्यक्षता में अलग-अलग बेंचों का गठन किया गया था।

इन न्यायिक अधिकारियों ने संभाली बेंचों की जिम्मेदारी

राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न बेंचों की अध्यक्षता न्यायिक अधिकारियों ने की। इनमें प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय अजय वर्मा, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनुपमेश मोदी, सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन) डॉ. अमन इंद्र सिंह, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) जैस्मिन कौर, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) गगन ठाकुर, सिविल न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) माधव मित्तल तथा अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (सीनियर डिवीजन), गुहला डिवीजन अक्षय कुमार शामिल रहे।

आपसी सहमति से होता है लोक अदालत में मामलों का निपटारा

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कंवल कुमार ने बताया कि लोक अदालत में मामलों का निपटारा पक्षकारों की पारस्परिक सहमति से किया जाता है। इसका उद्देश्य किसी एक पक्ष की जीत या हार नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति और सौहार्द के आधार पर विवाद को समाप्त करना है।

उन्होंने कहा कि लोक अदालत आमजन के लिए त्वरित और सस्ते न्याय का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसे जनता की अदालत भी कहा जाता है। लोक अदालत में मामलों के निपटारे के लिए किसी प्रकार के न्यायालय शुल्क की आवश्यकता नहीं होती।

यदि किसी पक्षकार ने पहले ही न्यायालय शुल्क जमा करवा रखा है और उसके मामले का निपटारा लोक अदालत के माध्यम से हो जाता है, तो नियमानुसार जमा किया गया न्यायालय शुल्क वापस किया जाता है।

13,260 मामलों के निपटारे से पक्षकारों को मिली राहत

कैथल राष्ट्रीय लोक अदालत में 26,842 मामलों में से 13,260 मामलों का निपटारा होने से बड़ी संख्या में पक्षकारों को राहत मिली। वहीं, 9,30,97,907 रुपये की राशि से जुड़े मामलों का समाधान होने से लंबे समय से चले आ रहे विवादों को आपसी सहमति से समाप्त करने में मदद मिली।

राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से मामलों के निपटारे से न केवल न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिलती है, बल्कि पक्षकारों को समय और खर्च बचाकर विवादों का शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त होता है।

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