SIR विवाद पर CPI(M) का चुनाव आयोग पर निशाना, कहा- चुनाव आयोग में सुधार जरूरी
कैथल, 24 सितंबर 2026। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) हरियाणा राज्य कमेटी ने मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर सामने आई मीडिया रिपोर्टों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार किया जाना चाहिए।
CPI(M) की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि इंडियन एक्सप्रेस में 23 सितंबर को प्रकाशित SIR से संबंधित रिपोर्टों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से उठाई जा रही चिंताओं को और गंभीर बनाया है।
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का दावा
CPI(M) ने अपने बयान में दावा किया कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण और SIR प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की हैं। पार्टी के अनुसार, कानून के तहत तीनों चुनाव आयुक्तों की समान भूमिका है और मतभेदों का समाधान बहुमत या सर्वसम्मति के आधार पर होना चाहिए।
पार्टी ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियों के बावजूद अपने विचारों को प्राथमिकता दी। CPI(M) ने कहा कि ये मतभेद मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा SIR प्रक्रिया के क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़े हैं।
SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल
CPI(M) ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त की ओर से SIR प्रक्रिया को पारदर्शी और विकेंद्रीकृत बताए जाने के बावजूद अब सामने आ रही रिपोर्टों से प्रक्रिया के अत्यधिक केंद्रीकृत होने को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
पार्टी ने यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया में निर्णय लेने की वास्तविक व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर स्पष्टता आवश्यक है। CPI(M) के अनुसार, मतदाता सूची में संशोधन जैसी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों का भी हवाला
प्रेस विज्ञप्ति में CPI(M) ने सुप्रीम कोर्ट की उन टिप्पणियों का भी उल्लेख किया, जिनमें SIR प्रक्रिया में तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता और नोटिस जारी करने के तरीके को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में मानवीय सत्यापन, पारदर्शिता और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता का मुद्दा
CPI(M) ने कहा कि चुनाव आयुक्तों के बीच सामने आए मतभेद केवल SIR प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये चुनाव आयोग की संस्थागत विश्वसनीयता, लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार से जुड़े व्यापक सवाल हैं।
पार्टी ने चुनाव आयोग में सुधार की मांग करते हुए कहा कि मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रियाओं में निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।
CPI(M) ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को लेकर जनता की चिंताओं का समाधान किया जाना आवश्यक है।
नोट: उपरोक्त आरोप और दावे CPI(M) हरियाणा राज्य कमेटी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में किए गए हैं।

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