
कैथल: कैथल से कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला ने आज कैथल की अनाज मंडी का दौरा किया। मंडी में किसान, मजदूर व आढ़तियों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं जानी और भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा।
आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि हरियाणा की नायब सैनी सरकार और केंद्र की मोदी सरकार किसानों की रबी फसलों, खासकर गेहूँ और सरसों की एमएसपी पर खरीद को चोर-दरवाजे से खत्म करने का क्रूर षड्यंत्र रच रही हैं। तीन काले कृषि कानूनों को किसान आंदोलन के दबाव में मजबूरन वापस लेने के बाद अब ये सरकारें ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पोर्टल के नाम पर नई-नई उलझने, बायोमेट्रिक अड़ंगे, ट्रैक्टर-ट्रॉली फोटो अपलोड, समय प्रतिबंध और अन्य अव्यावहारिक शर्तें थोपकर किसानों को मंडियों तक पहुँचने से पहले ही निराश कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि यह ‘तुगलकी फरमान’ असल में छोटे-सीमांत किसानों, भूमिहीन पट्टेदार किसानों, ट्रैक्टर-ट्रॉली न रखने वाले किसानों और उन परिवारों के लिए मुसीबत बन गया है जो दिन-रात खेतों में मेहनत करते हैं। भाजपा सरकार का मकसद साफ है — खरीद टारगेट घटाओ, उठान रुकवाओ, स्टोरेज की कमी पैदा करो और किसानों को मजबूर करके औने-पौने दामों पर फसल बेचने को विवश करो।
आदित्य सुरजेवाला ने कहा कि किसान व मजदूर के साथ-साथ आढ़तियों पर भी भाजपा सरकार ने प्रहार किया है। कांग्रेस सरकार में आढ़तियों को आधार 2.50% मिलती थी, जिसे अब कम कर दिया गया है। आज खरीदी गई फसल का उठान न होने के कारण आढ़तियों को गेहूं का दोगुना स्टॉक रखना पड़ रहा है, मंडियों में जाम लगा हुआ है और किसानों को 10-11 दिन बाद भी भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि सबसे विडंबना की बात यह है कि उठान के लिए आज तक टेंडर ही नहीं लगाया गया है। गेहूं की आवक तेजी से बढ़ रही है लेकिन किसान, मजदूर और आढ़ती को परेशानी में डालकर मंडियों को खत्म करने की साजिश की जा रही है।
आदित्य सुरजेवाला ने सरकार द्वारा थोपी गई मुख्य पेचीदगियों का जिक्र करते हुए कहा कि ट्रैक्टर-ट्रॉली पर नंबर लिखकर फोटो खींचना और पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य किया गया है, जबकि हर किसान के पास अपना ट्रैक्टर नहीं होता। हरियाणा में 85% से अधिक किसान ट्रैक्टर मालिक नहीं हैं, ऐसे में किराए की ट्रॉली के साथ यह नियम पूरी तरह अव्यवहारिक है।
उन्होंने कहा कि बायोमेट्रिक अंगूठा लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे किसान को खेत छोड़कर मंडी आना पड़ता है। कई बार मजदूर या परिवार के सदस्य फसल लेकर आते हैं, लेकिन बायोमेट्रिक के कारण फसल अटक जाती है। इसके अलावा इंटरनेट खराब होने या पोर्टल में गड़बड़ी होने पर भी किसान की फसल नहीं बिक पाती।
पट्टेदार किसानों की समस्या का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा में आधे से ज्यादा किसान ठेके पर खेती करते हैं। अगर जमीन मालिक मंडी में उपस्थित न हो तो पट्टेदार किसान अपनी फसल नहीं बेच सकता, जिससे उसकी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
उन्होंने कहा कि आउटपास के लिए तीन अधिकारियों के हस्ताक्षर अनिवार्य कर दिए गए हैं — मार्केट कमिटी सचिव, खरीद एजेंसी अधिकारी और ट्रांसपोर्टर। अगर इनमें से कोई भी उपलब्ध न हो तो फसल मंडी से बाहर नहीं जा सकती, जिससे उठान रुक जाता है और नई फसल की आवक भी प्रभावित होती है।
आदित्य सुरजेवाला ने आरोप लगाया कि सरकार ने गेहूँ खरीद का लक्ष्य 80 लाख टन से घटाकर 72 लाख टन कर दिया है, जबकि लाखों किसान पहले ही पंजीकरण करवा चुके हैं। बारदाने की भारी कमी है और ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर लाखों एकड़ का डेटा मिसमैच अभी तक ठीक नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि मौसम की मार ने किसानों की परेशानी को और बढ़ा दिया है। बेमौसम बारिश, आंधी और ओलावृष्टि के कारण गेहूँ को लगभग 50% और सरसों को 70% तक नुकसान हुआ है। खेतों में फसलें बिछी पड़ी हैं और किसानों के चेहरों पर मायूसी साफ दिखाई दे रही है।
अंत में उन्होंने मुख्यमंत्री नायब सैनी और भाजपा सरकार से मांग करते हुए कहा कि सभी प्रक्रियागत अड़चनों, बायोमेट्रिक बाधाओं, समय प्रतिबंध और ट्रैक्टर-ट्रॉली फोटो अपलोड की शर्तों को तुरंत हटाया जाए। गेहूँ खरीद का लक्ष्य बढ़ाया जाए और हर किसान की पूरी फसल एमएसपी पर खरीदी जाए।
उन्होंने यह भी मांग की कि बारदाने की कमी तुरंत पूरी की जाए, उठान के लिए टेंडर जल्द जारी किए जाएं, खरीदी गई फसल का भुगतान तुरंत किया जाए और फसल नुकसान का सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही आढ़तियों की आढ़त फिर से 2.50% की जाए।