कैथल। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय, कैथल की ओर से 13 अगस्त को मूंदड़ी गांव में भव्य तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। तिरंगा यात्रा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से मूंदड़ी की गलियां गूंज उठीं। विश्वविद्यालय परिवार के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों, विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने यात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
तिरंगा यात्रा सुबह करीब 10 बजे मूंदड़ी स्थित विश्वविद्यालय के निर्माणाधीन मुख्य परिसर से हरी झंडी दिखाकर रवाना हुई। गांव की विभिन्न गलियों से गुजरती हुई यात्रा लव-कुश तीर्थ पर पहुंचकर संपन्न हुई। हाथों में तिरंगा थामे विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने राष्ट्र के प्रति अपनी एकजुटता और देशभक्ति का संदेश दिया।
महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि से दिया राष्ट्रीय एकता का संदेश
मूंदड़ी की ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान को देखते हुए इस तिरंगा यात्रा का विशेष महत्व रहा। कैथल की प्राचीन भूमि कपिष्ठल से जुड़ी धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत और महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि के रूप में मूंदड़ी का उल्लेख इस आयोजन को और अधिक प्रतीकात्मक बनाता है।
मान्यता है कि इसी पावन क्षेत्र में माता सीता को आश्रय मिला तथा लव-कुश ने ज्ञान, संस्कार और पराक्रम की शिक्षा प्राप्त की। ऐसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल से तिरंगा यात्रा के माध्यम से राष्ट्रीय एकता, अखंडता और देशभक्ति का संदेश दिया गया।
कुलगुरू आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने बताया तिरंगे का महत्व
लव-कुश तीर्थ पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरू आचार्य राजेंद्रकुमार अनायत ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों का ध्वज नहीं, बल्कि भारत की जीवंत आत्मा और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक है। उन्होंने केसरिया रंग को त्याग और बलिदान, श्वेत को सत्य एवं पवित्रता तथा हरे रंग को समृद्धि और युवाओं की आकांक्षाओं से जोड़ा।
उन्होंने विद्यार्थियों और ग्रामीणों को ‘वंदे मातरम्’ के गौरवशाली इतिहास की जानकारी देते हुए कहा कि यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। उन्होंने युवाओं से देश की संस्कृति, विरासत और राष्ट्रीय मूल्यों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
वंदे मातरम् और राष्ट्रगान से भावुक हुआ माहौल
कार्यक्रम के दौरान छात्र, शिक्षक और ग्रामीण एक साथ ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन में शामिल हुए। इसके बाद राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ का भावपूर्ण गायन किया गया। महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि पर राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत इस माहौल ने उपस्थित लोगों में देश के प्रति गर्व और समर्पण की भावना को और मजबूत किया।
विकसित भारत @2047 का लिया संकल्प
तिरंगा यात्रा के बाद विश्वविद्यालय के युवाओं ने ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को दोहराया। विद्यार्थियों ने ज्ञान, अनुशासन, अच्छे आचरण और सेवाभाव के माध्यम से आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की शपथ ली।
इस अवसर पर कुलसचिव प्रो. संजय गोयल, अधिष्ठाता शैक्षणिक डॉ. जगत नारायण कौशिक, परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोडला, डॉ. सुरेंद्र पाल वत्स, डॉ. कृष्ण चंद्र पांडेय, डॉ. अखिलेश कुमार मिश्रा, डॉ. नरेश शर्मा, डॉ. शर्मिला और जनसंपर्क अधिकारी डॉ. गोविंद वल्लभ सहित विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, कर्मचारी, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संयोजन योग विभाग के प्रभारी डॉ. रामानंद मिश्र ने किया। तिरंगा यात्रा ने मूंदड़ी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रभक्ति के संदेश से जोड़ते हुए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की भावना को मजबूत किया।


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