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हरियाणा में बारिश से किसानों पर दोहरी मार, खेतों में गिरी धान की फसल और मंडियों में भीगा अनाज

मंडियों में पानी निकासी की व्यवस्था पर उठे सवाल, किसानों ने ₹300 प्रति क्विंटल बोनस और विशेष गिरदावरी कर मुआवजे की मांग की

कैथल/हरियाणा। सुबह हुई तेज बारिश और हवाओं ने धान की फसल तैयार होने की खुशी में जुटे किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। छह महीने की कड़ी मेहनत के बाद जब धान की फसल पककर तैयार हुई और किसान उसे बेचने के लिए मंडियों में लेकर पहुंचे, तो वहां भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण मंडियों में खुले में पड़ा धान भीग गया, जबकि खेतों में खड़ी फसल तेज हवा और बारिश के चलते जमीन पर बिछ गई। इससे किसानों के सामने फसल कटाई और उपज को सुरक्षित रखने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।

खेतों और मंडियों में किसानों को नुकसान

किसानों का कहना है कि इस बार धान की फसल का उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद थी। लंबे समय से कर्ज और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे किसानों के चेहरों पर फसल तैयार होने के बाद खुशी दिखाई दे रही थी, लेकिन सुबह हुई बारिश ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है।

खेतों में धान की फसल गिरने से कटाई करना मुश्किल हो गया है। वहीं, मंडियों में खुले आसमान के नीचे रखी धान की ढेरियां बारिश के पानी में भीग गईं। किसानों के अनुसार, खेतों में नुकसान हो या मंडियों में, दोनों परिस्थितियों में आर्थिक मार किसान को ही झेलनी पड़ रही है।

मंडियों में पानी निकासी की व्यवस्था पर सवाल

किसानों ने मंडियों में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि बारिश के बाद मंडियों में पानी जमा हो जाता है, जिससे खुले में पड़ा धान पानी के साथ बहने और खराब होने का खतरा बढ़ जाता है।

किसानों का आरोप है कि मंडियों में धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था और समय पर उठान सुनिश्चित किया जाता, तो नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता था। उनका कहना है कि मंडियों में बनी साइडों और उठान व्यवस्था की कमियों का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।

सरकार से ₹300 प्रति क्विंटल बोनस की मांग

बारिश से हुए नुकसान को देखते हुए किसानों ने सरकार और प्रशासन से राहत देने की मांग की है। किसानों की प्रमुख मांगें हैं:

  • मंडियों में पहुंचे धान की जिम्मेदारी लेते हुए किसानों को ₹300 प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए।
  • बारिश और तेज हवा से खेतों में गिरी धान की फसल की विशेष गिरदावरी करवाई जाए।
  • प्रभावित किसानों को नुकसान के आकलन के आधार पर उचित मुआवजा दिया जाए।
  • मंडियों में जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था की जाए, ताकि बारिश के दौरान अनाज को नुकसान न हो।
  • मंडियों में धान का समय पर उठान सुनिश्चित किया जाए और खुले में रखे अनाज को सुरक्षित रखने के इंतजाम किए जाएं।

किसान को खेत और मंडी, दोनों जगह नुकसान

किसानों का कहना है कि पहले से कर्ज के बोझ तले दबे अन्नदाताओं के लिए यह नुकसान सहन करना आसान नहीं है। फसल अच्छी होने की उम्मीद से किसानों को इस बार आर्थिक स्थिति में सुधार की आस थी, लेकिन बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी है।

किसानों ने सरकार और प्रशासन से अपील की है कि प्रभावित क्षेत्रों में जल्द नुकसान का आकलन करवाकर राहत प्रदान की जाए। उनका कहना है कि मंडियों में पहुंचे अनाज की सुरक्षा और खेतों में खराब हुई फसल के मुआवजे की जिम्मेदारी तय करना जरूरी है, ताकि किसानों को इस मुश्किल समय में आर्थिक सहारा मिल सके।