कैथल, 14 अक्टूबर। डिजिटल युग में ऑनलाइन सुविधाओं का इस्तेमाल बढ़ने के साथ साइबर ठगी के मामले भी चिंता का विषय बन रहे हैं। नौकरी, बैंकिंग, लोन और केवाईसी अपडेट के नाम पर लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, फोटो और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज हासिल कर साइबर अपराधी उनका दुरुपयोग कर सकते हैं। कैथल के पुलिस अधीक्षक मनप्रीत सिंह सूदन ने आमजन को सतर्क करते हुए कहा कि ऑनलाइन दस्तावेज साझा करने में की गई छोटी-सी लापरवाही साइबर ठगी का कारण बन सकती है।
नौकरी, लोन और KYC के नाम पर दस्तावेज मांगते हैं साइबर ठग
SP मनप्रीत सिंह सूदन ने बताया कि साइबर अपराधी खुद को बैंक कर्मचारी, सरकारी अधिकारी, निजी कंपनी का प्रतिनिधि, जॉब कंसल्टेंट या लोन एजेंट बताकर लोगों से संपर्क करते हैं। विश्वास जीतने के बाद वे केवाईसी अपडेट, लोन स्वीकृति, नौकरी की प्रक्रिया, इनाम या सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बहाने निजी दस्तावेज मांगते हैं।
कई बार ठग नकली वेबसाइट और फर्जी फॉर्म के लिंक भेजकर लोगों से दस्तावेज अपलोड करवाते हैं। बिना सत्यापन के दस्तावेज साझा करने पर उनका इस्तेमाल फर्जी सिम कार्ड जारी करवाने, बैंक खाते खुलवाने, लोन लेने, अवैध लेनदेन करने और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा सकता है।
आधार और पैन कार्ड का दुरुपयोग कर सकते हैं अपराधी
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि कई मामलों में पीड़ितों को काफी समय बाद पता चलता है कि उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल फर्जी खातों या संदिग्ध लेनदेन में किया गया है। कुछ साइबर अपराधी निजी दस्तावेजों का दुरुपयोग कर लोगों को ब्लैकमेल करने का प्रयास भी करते हैं।
उन्होंने नागरिकों को सलाह दी कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को अपने महत्वपूर्ण दस्तावेज भेजने से पहले उसकी पहचान और मांग की सत्यता की जांच अवश्य करें।
WhatsApp और सोशल मीडिया पर दस्तावेज भेजने से बचें
SP मनप्रीत सिंह सूदन ने लोगों से अपील की कि किसी अनजान नंबर या व्यक्ति को आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक, मार्कशीट अथवा अन्य निजी दस्तावेज साझा न करें। यदि कोई परिचित व्यक्ति भी दस्तावेज मांगे तो पहले फोन करके इसकी पुष्टि करें।
साइबर ठगी से बचने के लिए इन सावधानियों का पालन करें:
- दस्तावेज साझा करने से पहले सत्यापन करें: संबंधित बैंक, कंपनी या सरकारी विभाग के आधिकारिक माध्यम से संपर्क करें।
- अनजान लिंक से बचें: संदिग्ध वेबसाइट या फॉर्म पर निजी जानकारी अपलोड न करें।
- OTP और बैंकिंग जानकारी गोपनीय रखें: किसी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, पासवर्ड या संवेदनशील बैंकिंग जानकारी साझा न करें।
- स्क्रीन शेयरिंग में सावधानी बरतें: अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें और न ही अपनी स्क्रीन का एक्सेस दें।
- QR कोड सोच-समझकर इस्तेमाल करें: किसी अनजान व्यक्ति के भेजे QR कोड या भुगतान अनुरोध पर बिना जांच के कार्रवाई न करें।
- दस्तावेजों का सीमित इस्तेमाल करें: जहां संभव हो, केवल आवश्यक जानकारी साझा करें और दस्तावेज भेजने से पहले उसके उद्देश्य की पुष्टि करें।
साइबर ठगी होने पर 1930 पर करें शिकायत
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति से धोखाधड़ी की जाती है, उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग होता है या उसे गलत तरीके से दस्तावेज साझा करने के लिए दबाव बनाया जाता है, तो वह तुरंत संबंधित साइबर अपराध शिकायत माध्यम से संपर्क करे।
वित्तीय साइबर ठगी होने पर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर जल्द से जल्द शिकायत करें। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। समय पर शिकायत करने से ठगी की रकम को रोकने की संभावना बढ़ सकती है।
जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका
SP मनप्रीत सिंह सूदन ने नागरिकों से अपील की कि इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल जिम्मेदारी के साथ करें। साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ लोगों के विश्वास और भावनाओं का फायदा उठाते हैं। इसलिए किसी भी ऑनलाइन अनुरोध पर तुरंत भरोसा करने के बजाय पहले उसकी सत्यता जांचें।
उन्होंने कहा कि “सोच-समझकर ही शेयर करें” की आदत अपनाकर निजी दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जा सकता है। सतर्कता और समय पर कार्रवाई साइबर ठगी से बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

