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बैंकॉक की 5वीं ग्लोबल संस्कृत कॉन्फ्रेंस में डॉ. विनय सिंघल ने बढ़ाया कैथल का गौरव, बीज वक्तव्य और शोध पत्र किया प्रस्तुत

कैथल, 6 अक्टूबर 2026। आरकेएसडी महाविद्यालय, कैथल की संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. (श्रीमती) विनय सिंघल ने थाईलैंड के बैंकॉक में आयोजित 5वीं ग्लोबल संस्कृत कॉन्फ्रेंस में महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान देते हुए महाविद्यालय और कैथल का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया। ग्लोबल संस्कृत फोरम तथा शिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय, बैंकॉक द्वारा 28 से 30 सितंबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विश्वभर से संस्कृत के विद्वानों एवं विदुषियों ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान डॉ. विनय सिंघल ने बीज वक्तव्य प्रस्तुत करने के साथ-साथ अपना शोध पत्र भी प्रस्तुत किया। इसके अलावा उनकी पुस्तक “Modern Perspectives of Environmental Consciousness in Sanskrit Literature” का भी भव्य विमोचन किया गया।

भारतीय ज्ञान परंपरा और पर्यावरण चेतना पर शोध पत्र

डॉ. सिंघल ने 29 सितंबर को आयोजित तकनीकी सत्र में “पर्यावरण चेतना एवं सतत विकास: भारतीय ज्ञान परंपरा के परिप्रेक्ष्य में” विषय पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा आधुनिक समय में सतत विकास (Sustainable Development) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किस प्रकार मार्गदर्शन प्रदान कर सकती है।

28 सितंबर को आयोजित प्रथम तकनीकी सत्र में डॉ. सिंघल ने पद्मश्री विभूषित शिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय के संस्थापक एवं पूर्व अध्यक्ष श्री चरपत प्रपंदविद्या के साथ सह-अध्यक्षता भी की। इस सत्र में करीब 22 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।

शोध एवं अकादमिक योगदान के लिए डॉ. विनय सिंघल को शॉल और प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।

अंतरराष्ट्रीय मंच पर हुआ पुस्तक का विमोचन

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में थाईलैंड में भारत के राजदूत श्री पुनीत अग्रवाल, जर्मन यूनिवर्सिटी की श्रीमती ओल्गा नौचका, श्री बालमुकुंद पांडे, पद्मश्री विभूषित श्री चरपत प्रपंदविद्या, शिल्पाकोर्न विश्वविद्यालय तथा भारत के अन्य विद्वानों की उपस्थिति में डॉ. विनय सिंघल की पुस्तक “Modern Perspectives of Environmental Consciousness in Sanskrit Literature” का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर डॉ. सिंघल ने भारत के राजदूत श्री पुनीत अग्रवाल को ‘आयुर्वेदिक पाक कला एवं सात्विक जीवन शैली’ पुस्तक भी भेंट की।

आरकेएसडी कॉलेज प्रबंधन ने दी बधाई

आरकेएसडी महाविद्यालय प्रबंध समिति के प्रधान श्री अश्विनी शोरे वाला ने डॉ. विनय सिंघल को इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की उपलब्धियां संस्थान की शैक्षणिक पहचान को मजबूत करती हैं और विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए प्रेरित करती हैं।

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. गगन मित्तल ने कहा कि डॉ. सिंघल का अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह अकादमिक योगदान संस्कृत साहित्य, भारतीय ज्ञान परंपरा और पर्यावरण अध्ययन के अंतर्विषयक क्षेत्र में महत्वपूर्ण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह उपलब्धि महाविद्यालय के संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय शोध तथा अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहभागिता के लिए प्रेरित करेगी।

कैथल और आरकेएसडी कॉलेज के लिए गौरव का अवसर

बैंकॉक में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन में डॉ. विनय सिंघल की सहभागिता न केवल आरकेएसडी महाविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों तक ले जाती है, बल्कि कैथल और पूरे क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है।

यह उपलब्धि दर्शाती है कि संस्कृत वाङ्मय, भारतीय ज्ञान परंपरा और पर्यावरणीय चिंतन जैसे विषय आज वैश्विक अकादमिक विमर्श में अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए हैं। डॉ. सिंघल की अंतरराष्ट्रीय सहभागिता विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा तथा संस्कृत साहित्य के आधुनिक संदर्भों में अध्ययन और शोध के लिए नई प्रेरणा प्रदान करेगी।

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