कैथल, 4 अक्टूबर। एनआरआई विवाहों से जुड़ी कानूनी एवं सामाजिक जटिलताओं के प्रति युवाओं और अभिभावकों को जागरूक करने के उद्देश्य से महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय तथा डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत के संयुक्त तत्वावधान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के टीक परिसर में आयोजित कार्यक्रम का विषय “NRI Marriages: Do’s & Don’ts – A Way Forward in the State of Haryana” रहा।
कार्यक्रम में एनआरआई विवाह से पहले बरती जाने वाली सावधानियों, वैवाहिक संबंधों में कानूनी अधिकारों एवं दायित्वों तथा विवाह के बाद सामने आने वाली कानूनी और सामाजिक समस्याओं से बचाव के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विवाह भावनात्मक निर्णय के साथ कानूनी जिम्मेदारी भी: आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत
कार्यक्रम की अध्यक्षता महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने की। डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत के कुलगुरु प्रो. देविंदर सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कुलगुरु आचार्य राजेन्द्रकुमार अनायत ने कहा कि विवाह केवल सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि कानूनी दायित्वों से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय भी है। विशेष रूप से एनआरआई विवाह के मामले में भावनात्मक पहलुओं के साथ-साथ कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है।
NRI Marriage से पहले इन बातों की जांच जरूरी
विशेषज्ञों ने युवाओं और अभिभावकों को सलाह दी कि विदेश में रहने वाले व्यक्ति से विवाह करने से पहले उसके व्यक्तिगत, पारिवारिक, शैक्षणिक, रोजगार और वैवाहिक संबंधी विवरणों की उचित जांच-पड़ताल जरूर की जानी चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि किसी भी प्रकार के दबाव या जल्दबाजी में विवाह का निर्णय नहीं लेना चाहिए। विवाह से पहले संबंधित व्यक्ति की सही जानकारी प्राप्त करना, आवश्यक दस्तावेजों की जांच करना और अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है।
जागरूकता से रोकी जा सकती है धोखाधड़ी
विशेषज्ञों ने कहा कि एनआरआई विवाह आज वैश्विक सामाजिक परिवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इनके साथ कई बार कानूनी और सामाजिक चुनौतियां भी सामने आती हैं। ऐसे मामलों में विवाह से पहले पर्याप्त जानकारी और दस्तावेजों की जांच संभावित धोखाधड़ी तथा वैवाहिक विवादों को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने युवाओं एवं अभिभावकों से अपील की कि एनआरआई विवाह को लेकर किसी भी निर्णय से पहले उपलब्ध कानूनी उपायों, अधिकारों और जिम्मेदारियों की जानकारी जरूर हासिल करें।
विश्वविद्यालय के अधिकारी और विशेषज्ञ रहे मौजूद
कार्यक्रम में महर्षि वाल्मीकि संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. संजय गोयल एवं शैक्षणिक अधिष्ठाता डॉ. जगतनारायण कौशिक की गरिमामयी उपस्थिति रही।
डॉ. बी.आर. अंबेडकर राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, सोनीपत से डॉ. बलविन्दर कौर एवं डॉ. मुकेश कुमार तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कैथल से अधिवक्ता श्री नवनीत कुमार वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. गोविन्द वल्लभ ने किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. भाग सिंह बोदला, वित्ताधिकारी श्री कृष्ण कुमार भारती, डॉ. सुरेन्द्र पाल वत्स, डॉ. कृष्ण चन्द्र पाण्डे, डॉ. नरेश शर्मा, डॉ. रामानन्द मिश्र, डॉ. शर्मिला, डॉ. अखिलेश कुमार मिश्र, डॉ. चन्द्रकान्त, डॉ. हरीश कुमार एवं डॉ. नवीन शर्मा सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।d



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